Home Sahi kya Hai योग और योगा में क्या अंतर है ?

योग और योगा में क्या अंतर है ?

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योग और योगा में क्या अंतर है ?

योग और योगा इसमें दो विषय हैं। हम बहुत ही साधारण सी बात है अगर मैं करता हूं तो हमारे इसमें हलंत वाला क्रम होता है। संस्कृत में हम हलंत पे चलते हैं। वो आधा शब्द होता है। लेकिन हम जब राम की बात करते हैं तो हम राम में म का हलंत लगाते हैं क्या? हम योग में ग के नीचे हलंत लगाते हैं क्या? नहीं लगाते हैं। और इंग्लिश की जो ग्रामर है उसके अंदर भी सेम चीज है। अगर आप आधा शब्द लेंगे तो तो वाई ओ जी इज ओके पर क्योंकि आप योग को पूरा लिख रहे हैं तो ए लग रहा है। उनका प्रोनाउंसिएशन जो है वो योगा होगा। तो उसमें कोई ये विवादित चीजें हैं। मैं इनमें ज्यादा नहीं पढ़ना चाहता हूं और ना ही मैं पढ़ता हूं क्योंकि उनकी अपनी ग्रामर है और हमारे अपने शब्द हैं। हमारे शब्द को अगर अभी देखिए हमें उन्नत होना है। हमें ज्यादा से ज्यादा योग का विकास करना है। तो अगर स्पेनिश में योग को कुछ और बोल रहे हैं तो बोलने दीजिए ना। कहां समस्या है? ये विवाद के अरे योगा क्यों बोलना है? योग बोलो को कोई फर्क नहीं पड़ता है। तुम्हारे अंदर योग कितना है? महत्वपूर्ण ये है। मैं इस इस विचारधारा पे चलने वाला हूं। हम सभी को समान रूप से उतना ही माने। उनकी ग्रामर की अपना एक स्तर है। हमारा अपना एक स्तर है। हम योग को युज तो नहीं बोल रहे हैं। जिससे उत्पत्ति हुई है योग शब्द की। तो वही चीज है। उसको हमें इस तरीके से लेना चाहिए। यू इस कंट्रोवर्सी में पढ़ने का कोई सेंस नहीं है। मुझे ऐसा लगता है। योग योग है। उसे आप योगा कहें या कुछ भी कहें। हां। लेकिन जब हम बात करते हैं योग की तो अगर आप हिंदी शब्द में जाएंगे तो वह आत्म उन्नति की बात करता है। कि आप कितना आत्म उन्नत हो रहे हैं। यह योग है।

योगा जो है वह केवल और केवल शारीरिक पहलू पर ही काम कर रहा है। वो आत्म उन्नति की तरफ नहीं जा रहा है। आजकल एक बहुत अच्छा अवधारणा चल रहा है। लेकिन आजकल कर दिया है बियर योगा। आपने सुना होगा और नहीं सुना है तो मैं आपको अब बताता हूं। उसमें क्या करते हैं? बियर की बोतल पी रहे हैं और आसन कर रहे हैं। तो यह बहुत सारी ऐसी चीजें चल रही है। इसलिए योगा जो है वह गलत शब्द हम उसको समझ सकते हैं कि योगा नहीं बोलना चाहिए। योगा में हम आध्यात्मिक रूप से और धार्मिक नहीं हो पाते हैं। लेकिन जब हम योग की बात करते हैं तो हम आध्यात्मिक होते हैं और हम धार्मिक होते हैं। इसलिए हम योग को ज्यादा प्राथमिकता देते हैं।

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