नमस्कार भारत मेरे साथ चैनल में आप सभी दर्शको को स्वागत है आज जाने गें देव उठनी एकादशी और ग्यारस का महत्त्व ! देवउठनी एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित है और हर साल हिंदू महीने कार्तिक महा में आती है। यह कई भारतीय राज्यों में गन्ने की फसल का प्रतीक है। यह शुभ अवसर तुलसी जी के विवाह के भी मनाया जाता है इसमें भगवान श्री हरी ने तुलसी जी से विवाह किया था और हिन्दू धर्म के अनुसार इसी महा से विवाह होना शुरू भी होते है।
इसी विषय में आज बात करेंगे आचार्य श्री मुकेश नौटियाल जी से
प्रश्न :- एकादशी को सनातन धर्म में क्या महत्त्व है ?
उत्तर:- हिन्दू सनातन धर्म शास्त्रों के अनुसार एकादशी को बहुत बड़ा महत्त्व है कहतें है कि अगर आपने एकादशी को व्रत कर लिया तो फिर कोई भी व्रत करने कि आवश्कता नहीं होती है। क्योंकि ये व्रत सभी व्रतों में सर्वोपरि होता है। और इस दिन सनातन धार और शास्त्रों के अनुसार लोग चावल नहीं कहते हैं।
प्रश्न:- कार्तिक शुक्ल पक्ष एकादशी को देव उठनी एकादशी क्यों कहा जाता है ?
उत्तर:- शास्त्र के अनुसार चातुर्मास जो होता है जिसमे चार महीने ऐसे होते हैं जिसमे देव सयन करते हैं वो है आषाढ़ शुक्ल पक्ष एकादशी से लेकर कार्तिक शुक्ल पक्ष एकदशी इसमें देवता सयन करने चले जाते हैं परन्तु भगवान नहीं जाते हैं। अब आपको लग रहा होगा कि भगवान और देवताओं में क्या फर्क है तो भगवान वो होते हैं जो समस्त शक्तियों में परिपूर्ण होते हैं और देवता उन्हें कहते हैं जो सीमित शक्तियों होती हैं। तो देवता चार माह को सयन करके कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी को निंद्रा से बहार आते हैं तो उसे देव उठनी एकादशी कहते हैं इसमें एक मन्त्र भी है हरी प्रबोधन एकादशी
देव उठानी एकादशी मन्त्र
“”उत्तिष्ठोत्तिष्ठ गोविंद उत्तिष्ठ गरुडध्वज
उत्तिष्ठ कमलाकान्त त्रैलोक्यं मंगलं कुरु””
इस मन्त्र के माध्यम से कहते हैं की आप देव उठिए और पूरे त्रिलोक को ब्रह्माण्ड को आप मंगल ही मंगल करिये।
प्रश्न: -ज्योतिष के अनुसार एकादशी के दिन देहांत होने को क्या महत्त्व है ?
उत्तर:- देव उठनी या कार्तिक शुक्ल पक्ष एकादशी के दिन यदि किसी की मृत्यु होजाए तो बड़ा उत्तम मन जाता है। खतरे हैं की यदि किसी की मरतु एकादशी के दिन होती है तो स्वर्ग के कपाट खुले हुए मिलते हैं। यह भी एक मान्यता है की किसी की मृत्यु के बाद उसके लिए हम घर में गरुण पुराण करवाते हैं लेकिन यदि किसी की एकादशी वाले दिन होती है तो वो वो भी करवाने की आवश्यकता नहीं होती है|
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