प्राचीनी है। इनका भी जो है ऐसी किवदंती है कि किसी समय पर हनुमान जी ने मंदिर से निकल के इस कुंड में छलांग लगाई। स्नान करके आए। बाहर आए तो यहां से वहां तक पूरा पानी भरा हुआ। यहां वापसी विराजमान हो गए।
मूर्ति को स्पर्श स्पर्श तो आप ही करते हैं ना पंडित जी। हां केवल कितने वर्ष पुराना है
ये 400 वर्ष पुराना है। पहले छोटा सा कोटला था फिर पढ़ते पढ़ते ये जो है संतों की भूमि है। जी यही रह रहे हैं। हां हमारा वंशज यही से है। अच्छा वैष्णो में अच्छा वैष्णवही संत है। पहले यहां पर जो है संत जो रहते थे वो नागा साधु रहते थे। उनकी गृहस्ती नहीं रहती थी। और फिर जब बस्ती आसपास होने लगी तो फिर यहां के गुरुओं ने सोचा कि अब जो है यहां नागा नहीं रह सकते हैं। इसलिए फिर उन्होंने उनके चेले की ही जो है उनके हाथ से जो है गस्ती बसाई उसके बाद में फिर हम सब ग्रस्तआश्रम में आ गए। तो मेरी आठवीं पीढ़ी है यहां। अच्छा जी श्रावण महीने में जाप बाप बहुत होता है यहां पे। नवरात्रि में नौ ही दिन तक यहां पर 108 हनुमान चालीसा के पाठ होते हैं। अच्छा और सामूहिक रूप से यहां जो है 200 -300 आदमी बैठ के प्रतिदिन नौ दिन तक जो करते हैं। उसके बाद में फिर महाराज जी के द्वारा जो है उसका वो होता है। हवन होता है। हवन के बाद में जो है पूर्णहुति होती है। ठाकुर जी का भंडारा होता है। ऐसे कार्यक्रम ठाकुर जी आपके ही सानिध्य में भी होते हैं। ठाकुर जी के सानिध्य में ठाकुर जी के बहुत सुंदर बहुत प्राचीन यहां के धरोहर है हमारे ऊर्जा के केंद्र पुराना भी मंदिर है ना अच्छे से मतलब ध्यान रखा होगा

हनुमान जी की कोई विशेषता है इस अवतार की ?
विशेषता बस यही के यहां जो भी मन्नत होती है जो भी कामना करते हैं वो पूर्ण होती है और जो है प्रति मंगलवार शनिवार को जो है पाठ वगैरह भी देते हैं। मंगलवार को तो चूड़ा देते ही रहता है। हनुमान जी का श्रृंगार जो है प्रति मंगलवार को होता है।
श्रृंगार किस किस कहते हैं?
कुमकुम आदि नहीं सिंदूर से ये श्रृंगार चढ़ा पूरा सिंदूर चढ़ाना बाकी इनकी नई पोशाक बनाना। पोषक के प्रति मंगलवार को नहीं चेंज होती है। अभी जो है पूरा चेंज हो जाएंगे। कपड़े चेंज हो जाएंगे। आज जो है अभी 11 बजे बाद हो बन जाएगा ठाकुर जी का उसके बाद में पूरा सब चेंज हो जाएगा। अभी थोड़ा वस्तुस्थिति ठीक नहीं है इसलिए थोड़ा सा जीर्ण हो रहा है। ठाकुर जी प्रयास कर रहे हैं।
क्या ये मंदिर सरकार के अधीन है ?
नहीं संतों की ही संपत्ति है। ये सरकारी नहीं। सारी व्यवस्था जो है यहां के संत होगी।आप सभी इस यात्रा के साथ जुड़िए और हमें सब्सक्राइब कीजिए, फॉलो कीजिए और सनातन धर्म के लिए सहयोग कीजिए। बहुत-बहुत धन्यवाद। देखते रहिए भारत मेरे साथ।




