उसकी साथ पशुओं की जो सेवा की शुरुआत तो मतलब परदादा से हुई थी। मतलब पिताजी के पिताजी करते रहते थे। गांव एक बहुत हमारा गांव है। वहां पे बहुत सारी गाय वहां पर आज भी है। तो वो जब चरने के लिए जंगल और खेत में जाती थी तो वहां पे उनको कुछ भी मिलता नहीं था पानी वगैरह। तो मेरे दादा जी ने वहां पे बहुत साल पहले पानी के लिए वो तालाब बनाया था । तो आज भी वहां पर जितनी भी गाय जाती है सुबह जाके शाम को जब आती है तो दोपहर में खाना खाने के बाद वहां पर उनको पानी वगैरह आज भी है वहां पर पानी वगैरह आज भी रहता है तालाब में बारिश का पानी मतलब वहां से हुई थी शुरू फिर पिता जी भी सुबह स्नान ध्यान करके सुबह पहली रोटी गाय को खिलाते थे गुड़ और रोटी तो ये संस्कार हमने देखे थे पिता जी के अंदर भी और रिसेंटली मतलब चार पांच साल पहले पिता जी जब इस दुनिया को छोड़ के गए तो उन्होंने करीबन 30 बीघा जितनी जमीन वो गायों के लिए समर्पित किया। अच्छा तो उसमें से जितना भी फसल होती है, सब कुछ हम सिर्फ और सिर्फ गायों के लिए ही खिलाते हैं। अलग-अलग गौशाला वगैरह में वहां से वो दान जाता है। तो ताकि गौ माता जो भूखी रहती है, प्यासी रहती है तो उनको खाना और पानी की व्यवस्था वगैरह करते हैं।
कपिल ठक्कर अपना जन्मदिन में किस तरह से वो अभियान चलते हैं और कितने लोग आपके साथ में इस अभियान में जुड़े हुए हैं और कैसे आप कार्य करते हैं।
ये जन्मदिन जो मनाने की जो मुझे प्रेरणा मिली थी रामेश्वर शिव जी का राजस्थान में एक मंदिर है। वहां पे करीबन 300 जितने बंदर हैं। तो मतलब मेरा जन्मदिन भी नजदीक आ रहा था। और विशेष जो मैंने पशु पक्षी पर्यावरण को बचाने के लिए एक फिल्म बनाई है। फिल्म का नाम है चंदा सी बोली तो वहां पे मेरे शो चल रहे थे स्कूल में और मेरा बर्थडे भी नजदीक में था। तो वहां के जो दोस्त है सुबहपुर करके जो जगह है वहां के जो दोस्त है उन्होंने मुझे बोला कि चलो आप अपना बर्थडे हम एक मंदिर में जाके मनाएंगे। फिर वहां से शिव जी के मंदिर में मैं गया तो ऐसे ही गया था। तो फिर मैंने सोचा तो चलो आज बर्थडे मनाना है तो कुछ भगवान को भी खुश करने के लिए कुछ अलग सा कुछ करते हैं। बंदरों को ऐसे ही खिला देना अच्छा नहीं लगता है। फिर मैंने एक कपड़ा बिछाया वाइट कलर का उसमें राम लिखा और फल फ्रूट से पूरा राम लिखा और सारे बंदर वहां पे आए केक बनी और फिर सब बंदरों ने खाई तो मतलब वो मेरा एक फर्स्ट एक्सपीरियंस था। मतलब राम केक तब से मैंने अपने जन्मदिन पे जो भी कुछ बनाता हूं तो राम सियाराम का नाम लिख के वो आकृति के केक बनाता हूं और फिर वो फल फ्रूट वगैरह सब्जी वगैरह उनको खिलाता हूं। हम तो फर्स्ट मेरा बर्थडे वहां पे हुआ था। उसके बाद में जगन्नाथ मंदिर है अहमदाबाद के अंदर। वहां पे नौ हाथी के लिए मैंने करीबन 1000 किलो की केक बनाई थी। क्योंकि हाथी को तो टेबल भरभ के खाना चाहिए। तो उस दिन मेरा बिल आया था खाली खाने का फूड का जो बिल आया था वो 45000 का आया था तो उतना मैंने एक घंटे के अंदर सब हाथियों को बोला वहां पे आए रेड कारपेट पे उनकी एंट्री किया और उनको डाइनिंग टेबल वगैरह रखे थे सब हाथी के लिए अलग-अलग डाइनिंग टेबल तो उनके ऊपर उनको रख के खिलाया मेरा वो विशेष बर्थडे था और खास मैं श्री राम जी को बहुत मानता हूं कृष्ण भगवान को मानता हूं शिव जी का भक्त हूं तो विशेष जो बर्थडे के दिन ब्रह्म मुहूर्त में केक बनाता हूं 5:00 बजे सुबह 5:00 बजे ऐसे मंदिर चुनता हूं कि मतलब जो लोकप्रिय हो जहां के बहुत आस्था जुड़ी हो वहां से तो ऐसे मंदिरों में जो पशु रहते हैं उनको जो मनपसंद प्रिय भोजन है उसके केक बनाता हूं सुबह ब्रह्म मुहूर्त में और उस दिन भगवान की विशेष पूजा करता हूं क्योंकि बर्थडे हम कभी आजकल देखते होंगे आप भी केक है कि बर्थडे के दिन लोग केक काटते हैं, होटल में जाते हैं और आजकल तो यह भी ट्रेंड निकला है कि जितने भी केक वगैरह है सब गाल पे ये वो बॉडी पे लगाते हैं। तो बहुत फूड है तो फूड की आप रिस्पेक्ट करो। ठीक है? आप किसी को उस दिन अच्छी तरह से खाना खिलाओ, पिलाओ, किसी का पेट भरो और भगवान जी से आप मांगो। अपनी लंबी आयुष मांगो। क्योंकि बर्थडे तो एक दिन कम होता है ना हमारे जीवन का। तो हम उस तरह से बर्थडे मनाते हैं कि भगवान के मंदिर में जाते हैं। उनकी प्रार्थना करते हैं, पूजा करते हैं और जितने भी उनके आसपास के मंदिर के आसपास के जितने आवास में रहने वाले पशु पक्षी है तो उनको हम खिलाते हैं। तो एक मेरा ये बर्थडे है।
तो आपका पसंदीदा जानवर कौन सा है?
मेरा पसंदीदा जानवर में सारे जानवर है। सबसे ज्यादा बंदर को मैं बहुत मानता हूं क्योंकि मैं पता नहीं अनन्य भक्त हूं राम जी का। तो मैं दो लाइन भी ये भी कहना चाहता हूं कि
जब हम कृष्ण की पूजा करते हैं तो गाय को खिलाने के बिना वो कृष्ण की पूजा अधूरी है और राम की भक्ति करनी है तो पहले हनुमान जी उनके जो सेवक है उनको खिलाओ तो राम स्वचालित रूप से प्रसन्न होंगे।
कोई व्यक्ति अगर धार्मिक हो तो उसमें ये भाव होता है। तो इसको सनातन से कैसे जोड़ेंगे आप?
सनातन से ऐसे इसके लिए जोड़ना चाहिए क्योंकि ये जितने भी जानवर हैं, पशु पक्षी है, प्रकृति है वो हमारी धरती का सौंदर्य है। सबसे पहले तो क्योंकि उनके बिना ये धरती खूबसूरत लगेगी नहीं। नदियों के बिना, पहाड़ों के बिना, पेड़ पौधा के बिना ये मतलब सुंदरता है ही नहीं हमारे देश की। सिर्फ हम सिर्फ और सिर्फ मानव रहेंगे तो हमारी धरती की शोभा नहीं है ना वो। तो मैं उस लेवल से सोचता हूं क्योंकि जब भगवान ने उनको इस पृथ्वी पर भेजा है हमारा दोस्त बन के हमारे साथी बन के क्योंकि हर पशु बहुत उपयोगी है। गाय भी इतनी उपयोगी है। कैमल भी उतना उपयोगी, घोड़ा भी उतना उपयोगी है। हाथी भी उतना उपयोगी है। छोटे-छोटे जितने भी जीव जंतु है वो पर्यावरण के लिए भी बहुत उपयोगी है। हमारे मनुष्य जीवन के लिए भी बहुत उपयोगी है। और
शास्त्रों में यही कहा है ना कि मतलब एक गाय के अंदर 33 करोड़ देवी देवता है ।
तो मतलब मेरे घर पे मैं सुबह उठता हूं। 7:00 बजे करीबन मेरा रूटीन शुरू हो जाता है। कम से कम 100 जीवों को मैं खाना खिलाता हूं आज प्रत्येक दिन 100 जीवों को खाना खिलाने के बाद फिर मेरी ज्वेलरी शॉप पे मैं जाता हूं काम करने के लिए। तो मतलब मुझे ऐसा लग रहा है ना कि मेरी मां भी कहती है कभी-कभी कि जब आप एक पशुओं को खिला खिलाते हो ना खाना खिलाते हो या उनको पिलाते हो तो मतलब एक एक हवन हो गया एक एक दिन का वो हवन हो गया तो हमारे घर के अंदर तो 100 जितने पशुओं का भोजन होता है तो 100 हवन तो रेगुलर हम करते हैं
बीफ के एक्सपोर्ट में भी भारत देश सबसे ऊपर है। तो आप इसे कैसे अगर आप किसी पोजीशन पे होते तो आप इसको कैसे सॉल्व कर सकते हैं? क्योंकि आप पशुओं के प्रति संवेदनशील है |
देखो बहुत अच्छी बात कही। बहुत अच्छा मुद्दा भी है ये। क्योंकि अगर हर हिंदू हर मंदिर हर गांव हर शहर के अच्छे लोग क्योंकि बहुत सर इंडिया के अंदर बहुत पैसे हैं। सबके पास बहुत पैसे हैं। गांव के अंदर उतने पैसे हैं। शहरों में भी उतने पैसे हैं। तो हर एक व्यक्ति एक-एक गाय दो-दो गाय खाली अडॉप कर ले ना गौशाला में जाकर के अपने गांव के जाके अपने खेत के अंदर रखे ना तो गौ हत्या होगी नहीं क्योंकि हमारे घर में से कोई लेके नहीं जाएगा गाय।अगर हर अगर हम चाहते हैं तो हर सनातनी या मंदिर या फिर संत लोग अगर मिलकर के ये जितनी भी गौ माता है उनको अगर हम अडॉप करें गौशाला में जाकर के हम गाय को जब तक ले एक साल का गाय का खर्चा वगैरह हम दें तो गाय कटिंग ही नहीं होगी। गाय यहां से एक्सपोर्ट भी नहीं होगी। तो ये विषय पे भी हम काम कर रहे हैं अभी क्योंकि अभी तक मैंने करीबन 40 से 50 गाय मैंने खुद अडॉप दिया हुआ है गौशाला से मतलब 50 जीवों की तो मैं रक्षा करता हूं तो हर व्यक्ति को आगे आना चाहिए इसके लिए हर व्यक्ति को एक ना एक गौशाला में जाकर के एक गाय दो गाय को अडॉप करना चाहिए तो गौ हत्या होगी भी नहीं ना कभी
कपिल ठक्कर जी का एक अभियान नेपाल से भी जुड़े हैं क्योंकि पीछे आपने नेपाल यात्रा भी करी और तो नेपाल से आपको क्या प्रेरणा मिलती है कि क्यों आपने नेपाल को चुना है इन अभियानों के लिए?
नेपाल में तो इतना खूबसूरत भूमि अभी तक मैंने देखा नहीं है वहां पे यह प्रकृति है, यह पहाड़ है, और वहां के जो श्री कृष्ण प्रणामी परिवार है बौद्ध परिवार है गायत्री परिवार है वहां पे बहुत सारे लोग उनके वो काम कर रहे हैं इसी क्षेत्र को लेकर के क्योंकि नेपाल में आज भी करीबन 95% जितने भी मंदिर है के वहां पर आज भी बलि होती है तो वो लोग सालों से वो बलि को रोकने के लिए बहुत काम कर रहे हैं क्योंकि बलि को मतलब कोई अगर बलि देता है तो उनको प्रत्यक्ष रूप से हम नहीं बोल सकते कि भाई तुम ये मत काटो क्योंकि उसको मूलभूत जानकारी तो देना ही पड़ेगा ना तो वो जो जानकारी दे रहे वहां के प्रणामी संप्रदाय वाले हैं मैं हूं और भी दूसरी संस्था वाले हैं तो हम स्कूल में जाकर के जागरूकता के लिए कार्यक्रम करते हैं। मैंने जो डॉक्यूमेंट्री बनाई है तो वहां पर करीबन एक साल के अंदर 30 दिन में नेपाल के लिए मैं स्कूलों के लिए ये प्रोग्राम वगैरह करते हैं। तो ताकि उनको पता चले कि भगवान को केवल और केवल खून पसंद नहीं है। कोई भी देवी देवता को खून पसंद नहीं है। उनका फल फूल या फिर नारियल उतना भी चढ़ाओगे ना तो देवी या देवी या कोई भी देवता हो वो प्रसन्न होते ही है हमारे ऊपर। हम तो नेपाल में मेरे तीन जितने बर्थडे भी वहां पे सेलिब्रेट हुए। एक पशुपतिनाथ मंदिर है। बहुत जाना पहचाना पशुपतिनाथ मंदिर शिव जी की जगह है। वहां पे भी बहुत सारे बंदर रहते हैं। पशुपतिनाथ के आंगन में तो वहां पे मैंने 200 – 250 किलो का एक बार बर्थडे सेलिब्रेशन करके केक वगैरह बना करके खिलाया था।
फिर दूसरा एक जानकी माता का मंदिर है। जहां पे श्री रामचंद्र भगवान की जहां पे शादी हुई थी। सीता माता जो जन्म स्थान है वो जानकी मंदिर तो वहां पे भी बहुत सारी गाय है तो एक बार बर्थडे सेलिब्रेशन करने का मुझे वहां पे मौका मिला था माता जानकी की बहुत आराधना की और वहां से बहुत संकल्प भी किया था मैंने जानकी मंदिर से कि मतलब जब तक मैं जिंदा हूं तब तक मैं साल के अंदर 30 दिन में आपको सेवा के लिए नेपाल आऊंगा और सेवा करूंगा और हाल ही में अभी मेरा जब ये 2025 में जब मेरा बर्थडे सेलिब्रेशन हुआ 19 नवंबर को तो वह भी एक महेंद्र नगर करके एक जगह है। वहां पे विष्णु भगवान का मंदिर है। जंगलों में बहुत घना जंगल है। वहां पे बहुत सारे बंदर रहते हैं। और मैंने देखा कि उस मंदिर के अंदर चार जितने अंधा संत थे। वो अंधा संत होने के बाद भी इतने सारे बंधनों की सेवा करते हैं। उनको खिलाते हैं, पिलाते हैं। भगवान जी का जो आवास है उसको मतलब एक साफ सुथरा रखते हैं। भगवान को पूजा करते हैं। अर्चना करते हैं। वो अंधा हो के भी जब इतना कर सकते हैं तो हम तो देख रहे हैं। तो देखने के बाद तो हमें तो कितना उनसे प्रेरणा लेकर के हमें काम करना चाहिए। तो वहां पे इतने अच्छे-अच्छे टेंपर्स हैं, इतने इतने ब्यूटीफुल लोग हैं। तो मैं भी आपको भारत मेरा साथ चैनल को कहूंगा कि आप भी वहां पे जाइए और उन लोग से मिलिए और नेपाल हिंदू राष्ट्र है और भी वहां पे बहुत अच्छे लोग हैं।
हम अच्छा एक चीज और है कि मैं जैसे आप पशुओं के बहुत करीब रहते हैं। तो मैं थोड़ा-थोड़ा हर पशुओं का जो है नेचर आपसे जानना चाहूंगी। जैसे आपने कहा कि बंदर बंदर का स्वभाव कैसा है? स्वभाव पे अगर बात करें थोड़ा सा बंदर दो तरह के होते हैं। गुजरात के जो बंदर है ना वो काले मुंह वाले उसको लंगूर बोलते हैं। लंगूर तो वो बहुत फ्रैंकली होते हैं। वो अगर आप उसको हाथ में खिलाओ तो वो खाएगा पिएगा। वो बहुत फ्रैंकली रहता है। किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है। मतलब मेरे घर पे जब वो आते हैं ना 30 40 40 50 मेरे घर पे आते हैं तो मेरी मम्मी उनको खिलाती है और वो शैतान नहीं होते हैं। बहुत फ्री माइंड होते हैं। तो बहुत गुलमिल जाते हैं। बस आप कोई भी एनिमल्स को खाना खिलाओ या फिर पिलाओ। तो आप उसकी तरह उसकी आंखों की तरह आप मत देखिए। मतलब जैसे आप खा रहा है ना तो आप ऐसे बस आप ऐसे रखिए ऐसे रखिए ऐसे रखिए वो खा लेगा अगर आपने उसकी आंखों की तरह देखा है तो उसको लगेगा कि ये मुझ पे अटैक करेगा तो उस चीज को खाली डिस्टेंस रखता है जो कोई भी एनिमल्स हो उसको आप बस आंखों में मत देखिए
हाथी का कैसा स्वभाव है?
हाथी भी बहुत शांत है उसको सबसे ज्यादा गन्ना पसंद है। उसको गुड़ पसंद है। वेजिटेबल्स भी बहुत खाता है। हम तो उनका भी स्वभाव बहुत अच्छा है। बहुत फ्रैंकली है और गाय भी उतनी पवित्र है कि बस आप कोई भी तीर्थ स्थान नहीं जाओ ना गाय को खाली गुड़ रोटी खिलाओ उसकी आरती उतारो और वहां पे जो उसका आवास है जहां पे रहती है उसके वहां की खाली मिट्टी का आप तिलक भी कर दो ना तो भी आपकी सारी मनोकामना पूर्ण हो जाती है। इतनी बड़ी उसके पास हो सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने भटकते हुए कुत्ते को लेके काफी प्रोटेस्ट किया गया क्या है कि भटकते हुए कुत्ते भी टेंपरामेंटल होते हैं तो आप किससे समर्थन में हैं कि भटकते हुए कुत्ते को किस तरह से रखा जाए जो वो कुत्ते का काटना से भी हम लोग बचें। और उनकी सुरक्षा भी हो। तो तरीका क्या हो सकता है?
भटकते हुए कुत्ते कि मतलब देखो हमारे ग्रंथों में उसको चौकीदार कहा है। मतलब घर की रक्षा वही करता है। पहले भी करता था। आज भी हमारे खेत वगैरह गांव वगैरह तो रात को कोई चोर आता है तो सबसे पहले कुत्ता ही भौंकता है। हमें मतलब अलर्ट करता है कि कोई मतलब हमारे नुकसान करने के लिए आया है। तो वहां पे जितने भी एनिमल लवर है वो उनका भी कोई विरोध गलत नहीं है कि मतलब आज एक छोटी सी जगह पे कैच के अंदर उसको आप बांध के रखोगे तो उसका जीवन ही खत्म हो जाएगा। मतलब आप जिंदा आदमी को आप इतना सजा के सजा दे रहे हो। मतलब जिंदा जिसने कोई गुनाह नहीं किया है। अब वो तो बेजुबान है। वो कभी अगर
वो एग्रेसिव कब होता है कि जब उनको भूख मतलब भूख भूख लगती है उनको खाना नहीं मिल रहा तो वो अग्रेसिव होते हैं। तो जो एनिमल लवर डाल रहे हैं उनको उनका भी कभी विरोध नहीं करना चाहिए सरकार का कि और सब अभी मतलब नसबंदी भी उतनी ही हो रही है। आज भी कर रहे हैं। बहुत सारे एनजीओ वाले हैं वो कर रहे हैं। तो अभी पपुलेशन तो उतनी उनकी बढ़ नहीं रही है। पर जो है उनको अगर अच्छे से केयर करें उनको ख्याल रखें। अलग-अलग संस्थाओं को इसके लिए सरकार फंड भी देती है। खिलाने के लिए पिलाने के लिए उनकी केयर के लिए तो वही सबसे बेस्ट रहेगा।





मैं यह भी समझना चाहूंगी जैसे आप जगह-जगह जाते हैं। अब भारत में भी ऐसी कई सारी जगह है जहां पे पशुओं पे काफी पशुओं के हॉस्पिटल भी हैं। वेटनरी डॉक्टर्स हैं। पशुओं के हॉस्पिटल भी हैं। तो वहां पे देख देखा जाए तो ज्यादातर सुविधाएं कम होती है। मतलब क्या होता है कि स्पेस कई जगह पे स्पेस कम पड़ जाता है। तो उस तरीके से अब कई हॉस्पिटल विवादों में भी है कि यहां पे आ तो जाते हैं जानवर लेकिन किसी ना किसी वे में उनको काटवाट के बाहर एक्सपोर्ट किसी ना किसी तरीके से किया जाता है। तो पशुओं के जो अस्पताल हैं उनको किस तरह से मेंटेन करना चाहिए पशुओं को?
देखो सरकार फंड भी देती है। सोशियल जो लोग हैं, गांव के लोग हैं, शहर के लोग हैं, बिजनेसमैन है, वह बहुत फंड देती है। और कोई भी एनजीओ है, कोई भी गौशाला है, तो उनको एक विशेष लोग हैं वो। हमारी नजर में वो विशेष लोग हैं। मतलब विशेष लोगों को यह ड्यूटी सौंपी जाती है कि भ तुम जितने भी यहां पे पशु आ रहे हैं वो बीमार है या फिर कोई लकवा वाले पैरालिसिस वाले कोई एसिड डाला है तो उनके निरंतर वो सेवा करना उनका एक सबसे पहले फर्ज है। से अच्छे बहुत सारी जगह पे अच्छी-अच्छी सेवा भी होती है। अब कई जगह पे सेवा नहीं होती है। तो अभी उसके लिए हमें थोड़ा अलर्ट होना चाहिए। जो भी वहां पर जो डोनेशन दे रहे हैं जो जो लोग उनको वीक में एक बार कम से कम जाना चाहिए। वहां पर कर्मचारियों को पूछना चाहिए कि कि आपको क्या जरूरत है यहां पे? क्या नीड है? बराबर आपको क्या आवश्यकता है? तो ये तो जनरल पब्लिक और जो वहां के जो सदस्य है वही लोग इसको बेटर और अच्छा बना सकते हैं।
हम अब आखिरी प्रश्न लूंगी कि सेवा को अगर आप एक लाइन में समझाना चाहे कि सेवा क्या होती है? क्योंकि आप सेवा ही करते हैं।
जी उसके लिए तो एक लाइन है कि प्रत्येक जीव में शिव है। वाह। प्रत्येक जीव में शिव है। तो मतलब अगर आपको मनुष्य जीवन मिला है तो आप खूब पुण्य कमाए, खूब सेवा करें। खूब अध्यात्म में आप आगे बढ़े कि आज बहुत सारे सेलिब्रिटी लोग भी हैं जो सेवा करते हैं डायरेक्टली नहीं तो इनडायरेक्टली भी करते हैं। तो ये पृथ्वी का जो बैलेंस है वो बना रहेगा। अगर पशु हमारे आसपास में होंगे वो फ्रैंकली रहते हैं। वो फ्रैंकली हमें प्यार करते हैं। हम उनसे जुड़ेंगे तो हमारा जो घर का आसपास का एटमॉस्फियर है वो अच्छा बना रहा है। और भगवान की नजर में हम सबसे बेस्ट ह्यूमन बीइंग बनेंगे। जब हम किसी की इतनी अच्छी सेवा करेंगे। चाहे वो गाय है या कुत्ता है या घोडा है या फिर हाथी है। किसी को भी मतलब और उनके पास रह के मतलब हमें इतनी पॉजिटिव मिलती है ना जैसे आप गाय के साथ में रहोगे क्योंकि उनके अंदर वो गलत संस्कार नहीं है। उनके अंदर कोई वो तनाव वगैरह नहीं है। वो एकदम सॉफ्ट हार्ट है और ब्लेसिंग हार्ट है उनका। तो हम जब उनके आसपास में रहते हैं, जब उनकी ओरा में रहते हैं तो हमें बहुत मतलब अंदर से बहुत प्रसन्नता मिलती है। क्योंकि आज हर व्यक्ति दुखी है। तो मतलब डिप्रेशन में है। अपने कामों में व्यस्त है। कोई पैसों से दुखी है। तो जब हम एनिमल्स के साथ में, नेचर के साथ में, बर्ड्स के साथ में हम जब जितना समय उनके साथ बिताते हैं तो मतलब उतना घंटा तो हम फ्रेश ही रहते हैं।
कपिल ठक्कर जी दोनों वर्ग के लोगों के लिए आप एक बढ़िया सा संदेश दें क्योंकि आज दिन है देश का ही दिन है ?
बस मेरा आप सभी लोगों से अनुरोध भी है मेरा क्योंकि आज मैंने अपने जीवन में जो भी कुछ कमाया है ना तो इन बेजुबाओं की जानवरों की आशीर्वाद से कमाया है। आज मुझे ऐसा भी कभी-कभी महसूस होता है कि मतलब परमात्मा मेरे आगे पीछे सब जगह पे है। क्योंकि मैं उनकी इतनी सेवा करता हूं तो मतलब परमात्मा का साक्षात्कार भी है। मुझे लास्ट में यही कहना है कि पहली रोटी गाय के लिए आज भी निकालो। दूसरी कुत्ते के लिए निकालो और अपना जन्मदिन, अपनी एनिवर्सरी वगैरह जितने भी मंदिर है, मंदिर के आसपास में जितने भी जीव-जंतु रहते हैं, पशु पक्षी रहते हैं, पर्यावरण से संबंधित जितने भी है तो उनकी आप ज्यादा से ज्यादा सेवा करो। हो सके तो अपने आसपास में कभी कचरा वगैरह मत फेंकिए क्योंकि वो कचरा वगैरह गाय वगैरह कोई भी जानवर खाते हैं तो बहुत उनको तकलीफ होती है। उनकी स्वास्थ्य भी उतनी खराब होती है। तो मैं उतना भी अनुरोध करूंगा कि हमारे घर के आसपास में जितने भी जीवजंतु रहते हैं उनका भोजन कराओ। गर्मी वगैरह में उनके लिए पानी के बाउल वगैरह रख दो। तो भी आप एक भगवान के बेस्ट व्यक्ति बन जाएंगे।
मैं भी आपको धन्यवाद देना चाहता होगा भारत मेरे साथ और उनको मेरी तरह से मेरे मतलब एक ह्यूमन नेचर की तरह से राम भक्त की तरह से मैं उनको बहुत आशीर्वाद देता हूं कि आप आप जो काम के लिए निकले हो घर से अपने ऑफिस से वो पूरा का पूरा आपका वो काम आपको सफल बनाए भगवान आपको शक्ति प्रदान करें और जय श्री राम
जय श्री राम और इसी के साथ हमें इस एपिसोड का अंत करते हैं और कपिल जी को भी आप सभी लोग शुभकामनाएं दीजिए कि ऐसे निस्वार्थ भाव से वो पशु पक्षियों की सेवा हर वर्ष करते रह और हर दिन करते रह जैसा उन्होंने कहा कि वो हर दिन करते हैं तो हर दिन करते रह और हम लोग कपिल जी के सहयोग से जो है बिल्कुल नेपाल भी प्रस्थान करेंगे जो इन्होंने कल मुझे चर्चा में कहा कि आप नेपाल जाइए तो इनके कहने से हम लोग जो है नेपाल की तरफ भी बढ़ेंगे और वहां पे भी कार्य करेंगे तो आप सभी को गणतंत्र दिवस की ढेर सारी शुभकामनाएं। देखते रहिए भारत मेरे साथ। फॉलो कीजिए, सब्सक्राइब करिए।




