नमस्कारभारत मेरे साथ चैनल में आप सभी का स्वागत है धार्मिक यात्रा की दूसरा स्थान उज्जैन
हम है इस वक्त उज्जैन में। उज्जैन की भूमि में महाकाल की भूमि में हम लोग इस वक्त प्रस्थान कर रहे हैं श्री काल भैरव मंदिर की तरफ। जैसा हमने आपको कहा था कि यह एक धार्मिक यात्रा करने जा रहे हैं। भारत मेरे साथ के संकल्प के दूसरी शुरुआत है। पहला संकल्प गणगंगा से था। अब दूसरा जो है हम लोग काल भैरव के मंदिर की ओर जा रहे हैं। यह उज्जैन की अष्टभैरव यात्रा है जो बहुत कम लोग जानते हैं और जब भी आप उज्जैन आए तो आप जरूर इसको इसको करें हर हर महादेव तो इसको जरूर करें और अष्ट भैरव यानी कि जो शिव और शक्ति की सेना है या आठ भैरव जो है वो महाकाल की सुरक्षा करते हैं और इन आठ भैरव की यात्रा करने से आपको तंत्र और अध्यात्म दोनों का जो है ज्ञान मिलता है। हम लोग अभी प्रस्थान कर रहे हैं काल भैरव यात्रा की तरफ और हम लोग जो हैं आपको दिखाएंगे काल भैरव मंदिर के दर्शन कराएंगे। हमारे Facebook पेज पे आप रहिए। हमारे YouTube को फॉलो करिए और धार्मिक यात्रा का हिस्सा बनिए।
नमस्कार। इस समय काल भैरव मंदिर यानी कि उज्जैन की अष्टभैरव यात्रा की शुरुआत हो चुकी है और आठ भैरवों में से पहला भैरव है काल भैरव और काल भैरव मंदिर में हम लोग जो है मंदिर प्रवेश कर चुके हैं और यहां की पूरी कहानी यहां का दृश्य आपको दिखाएंगे।
जय श्री काल भैरव काल भैरव जी की उत्पत्ति स्वयं भगवान यहां आकर के विराजमान हुए हैं। किसी ने भैरव जी की उत्पत्ति नहीं करी है और ना ही किसी ने राजा भरथरी ने 600 वर्ष पहले निर्माण कराया था। भगवान यहां विराजमान ऐसे हुए जैसे ब्रह्मा जी का जो पांचवा मस्तक था। जैसे पूरी सृष्टि की रचयिता करने वाले ब्रह्मा जी थे। ब्रह्मा जी का मस्तक के पास जो पांचवा मस्तक था उसको अहंकार आ गया था। अहंकार आने के बाद में वो कह कि मैंने बनाई इस सुंदर सृष्टि को खत्म करना चाहता हूं। पांचवा मस्तक ब्रह्मा जी का बोला। फिर सभी ब्रह्मा जी ने जो शिव जी थे सभी लोग आए विष्णु भगवान ने बोले कि हम बड़े हम बड़े। विष्णु भगवान ने कहा कि अपने नाथ कौन है? शिव जी शिव जी के पास चलिए। अपन बता दें कि कौन बड़े हैं। तो शिव जी के पास सभी देव गए और शिव जी को बोला विष्णु जी ने कि साहब ये सृष्टि खत्म कर रहे हैं। तो सृष्टि के बारे में बताइए। तो भर शिव जी के कुर से भैरव जी की उत्पत्ति हुई। भैरव जी की उत्पत्ति होते ही ब्रह्मा जी का जो पांच सकता है भैरव जी ने छेदन कर दिया था इस उंगली से। इसलिए इस उंगली से पूजा नहीं होती है। तो अच्छे के लिए करो बुरे के लिए दोस्तों दोष लगा ब्रह्मा जी को भैरव जी को। ब्रह्म हत्या का दोष लगा। दोष लगने बाद में सब दूर घूम। पीड़ा होने लगी। एक काशी के कोतवाले यहां के सेनापति के रूप में विराजमान है। एक काशी में आकाशवाणी हुई कि आप उज्जैनी नगरी में जाइए या शिपना नदी के स्नान कीजिए और तामसिक पूजा में भैरव पर्वत पे बैठिएगा। भगवान यहां आकर के भैरव पर्वत पे विराजमान हो गए। तो तामसी पूजा में मांस मदिरा जो भी अवगुण होते हैं भगवान भैरव जी को चढ़ाए जाते हैं। जैसे मदिरा है मदिरा भगवान को शौक नहीं मदिरा पीने का। भगवान जो अवगुण होते हैं वो पिया। तो यहां शिव जी थे भोलेनाथ जी उनको पता चला कि मेरी नगरी में व्यक्ति कौन आया? साहब इतने सब पी रहे हैं। तो शिव जी आए इनसे भैया आप कौन हो? तो उन्होंने बोला मैं आपके क्रोध से उत्पत्ति हुई थी मेरी और मैं यहां विराजमान हूं। तो शिव जी ने इनको वरदान दिया कि आपके दर्शन यहां सेनापति के रूप में आप विराजमान होइए। आपके दर्शन करने से जो भी आपके दर्शन जो भी कष्ट होता है जैसे कोई पीड़ा ले कोई दोष हो वो दोष दूर हो जाता है भक्तों का इसलिए भगवान यहां मदिरा पान करते हैं भगवान को शौक नहीं है मदिरा पीने का और मदिरा किसी को पीना भी नहीं चाहिए ये सिर्फ भगवान के लिए बुरी चीज बनी है जो अपने अवगुण होते हैं वो वो समा करके भगवान को मदिरा का भोग लगाते हैं जय श्री काल भैरव
जैसा हमने कहा था कि हम पूरे भारत में 2026 से शुरू करेंगे अपनी धार्मिक यात्रा और पहली पहली यात्रा जो है हमने गणगंगा हापुड़ उत्तर प्रदेश से शुरू करी और दूसरी यात्रा जो है हम उज्जैन में अष्टभैरव यात्रा करेंगे। यानी कि उज्जैन के जो आठ भैरव हैं उनकी यात्रा करेंगे जो सभी मंदिरों को हमारे द्वारा सहयोग मिले इसकी प्रार्थना और कामना करेंगे और जिन जिन लोगों ने हमारा साथ इस यात्रा में दिया है उनको भी यही कहेंगे कि आपकी भी जीवन मंगलमय हो। आपका जीवन शुभ हो। बहुत-बहुत धन्यवाद। जय सनातन जय भारत। हर हर महादेव




