Monday, January 26, 2026
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वैदिक वास्तु और मॉर्डन वास्तु क्या है ?

नमस्कार भारत मेरे साथ चैनल के सभी दर्शकों का सही क्या है के वास्तु टिप्स एपिसोड में आप सभी का स्वागत है। आज बात करते हैं वास्तु एक्सपर्ट की जो घर में किसी भी परेशानियों को अपनी विधा के अनुसार सही करते है और बताते हैं कि आपके घर दरवाजा किस तरफ होना चाहिए रसोईं किधर होनी चाहिए किस तरफ सर करके सोना चाहिए इतय्दी पहले घरों में ज्यादा कमरे क्यों बनवाये जाते थे इन सभी पर आज बात करेंगे वास्तु एक्सपर्ट अलोक गौतम जी से |

प्रश्न:- वैदिक वास्तु और मॉर्डन वास्तु में क्या अंतर है ?
उत्तर:- वैदिक वास्तु और मॉर्डन वास्तु में जो सबसे बड़ा अंतर है जो हम पुरानी वास्तु कहते हैं। पुरानी वास्तु के अनुसार सामान चार दिशाएं होती थी पूर्व पश्चिम उत्तर दक्षिण फिर बाद में आठ दिशाएं होने लगी मतलब की चार दिशाएं और चार उपदिशाएं उसमे जुड़ गयीं। तो अब हम लोग आठ दिशयों पर काम करते हैं तो इसमें बहुत सारी चीजे आती ऐसी हैं जिसमे हम समझते हैं कि यह तो मेरा साऊथ वेस्ट है लेकिन वो साऊथ वेस्ट नहीं होता है। यह हमको तब समझ में आया जब हम 16 जोन पर काम करते हैं। मॉर्डन वास्तु में तो बहुत पिन पॉइंट आपको मिलता है अब ये सवाल आता है कि १६ दिशाओं में काम करने वाली की बात कैसे आयी तो ये स्थापत्य वेद अथर्व वेद इसमें लिखा है कि पहले १६ कमरे बनाने का विधान था और ये कमरे ३६० डिग्री में बनाये जाते थे और सभी कमरे डिग्री के अनुसार बनाते थे किस काम का कमरा किस दिशा में कितनी डिग्री में होना चाहिए लेकिन जब से लोग फ्लैट्स में आगये हैं तो मॉर्डन वास्तु के अनुसार १६ जॉन में काम करना पड़ता हैं।

प्रश्न:- जो लोग वास्तु को नहीं मानते हैं उन्हें कैसे समझाए कि वास्तु क्या है ?
उत्तर:- जब आप वास्तु का अभ्यास करते हैं और आप अच्छे कंसल्टेंट है तो आपको बात करते करते सामने वालो से समझ में आ जाता है कि ये अपने कमरे किधर सोता है कहाँ बैठता है या कहाँ पर ज्यादा समय बतीत कर रहा है। अपने घर में।।
मैं किसी के घर में गया और उसने मुझसे यह कहा कि अब मैं बहुत परेशान हो गया हूँ। आप वास्तु करने तो आये हैं पर मुझे कुछ समझ नहीं आता की मैं करूं।।
क्या होता है कि वास्तु देवता जो हैं उनका घर में जो स्थान है उनका सिर है नार्थ ईस्ट में तो इसका मतलब ये है कि वास्तु देवता उनके सोने वाले स्थान से परेशान हैं इस लिए इनका नार्थ ईस्ट सही कर दो सब कुछ सही हो जाये गा।। जो लोग वास्तु नहीं मानते हैं उनसे यही कहना चाहूंगा कि वास्तु में आप हर चीज लॉजिकल एक्सप्लेन कर सकते हैं डिग्री के साथ।।

प्रश्न:- वास्तु के अनुसार जिस घर में देवताओं का वास होता है तो उसका साधारण उपाय क्या है ?
उत्तर:- इस उपाय के पीछे एक पौराणिक कथा है एक बार देवताओं में और असुरों में युद्ध हुआ और इसका उल्लेख मत्सय पुराण में है। बताते हैं कि देवतों के सेनापति थे भगवन शिव और असुरों के सेनापति थे अंधकासुर जो बहुत बियर बलशाली था उसने बहगवां शिव जी को बल युद्ध में परास्त कर दिया जिससे भगवन शिव के शरीर से पसीना नीचे गिरने लगा और उस पसीने से एक विशालकाय पुरुष पैदा हुआ। जिसे बहुत तेज से भूख लगी तो उसने असुरों और देवताओं को मार कर खाना शुरू कर दिया। यह देख कर देवता और असुर सब घबरा गए और सबके सब भगवान बह्मा के पास गए और उनको सारी गाथा सुनाई। तो ब्रह्मा जी ने बताया की 44 देवता और एक मैं मिल कर उसे बंधक बनाते है। और जमीन पर उसे नाक नीचे करके लिटाते हैं और इसका सिर नार्थईस्ट की तरफ और पैर साउथवेस्ट कि तरफ करते हैं और सभी लोग इसके ऊपर चढ़ कर बैठ जाओ मैं इसकी नाभि में बैठ जाता हूँ। इसीलिए कहते हैं कि वास्तु अनुसार घर का बीच का स्थान ब्रह्मस्थान बोलते हैं । इसी तरह से करके 45 देवताओं ने जिनको आज 45 एनर्जी फीड कहते हैं इन्होने उस वास्तु पुरुष को दबा लिया अपने नीचे तो ये सभी के घर में होता है। जब हमारे घरों में किसी प्रकार से कोई समस्या होती है । तो कोई न कोई देवता नाराज है तो आप उन सभी 45 देवताओं कि उपासना कर दीजिए गा। सब सही हो जाये गा।।

वास्तु की इस रोचक बातचीत को देखने के लिए दिए गए लिंक पर क्लीक करे और चैनल को सब्सक्राइब करें।

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