नमस्कार भारत मेरे साथ चैनल में आप सभी दर्शकों का स्वागत है। आप सभी जानतें हैं कि आज के समय में भक्ति को लेकर, सनातन लेकर बहुत बात होती है। मंदिरों की, धर्मो की, जाति की, इतय्दी की और इसमें भक्ति लेकर भी कई बाते होती हैं कि भक्ति कितने प्रकार की होती है। क्योंकि कोई सद्गुण भक्ति करता है तो कोई निर्गुण भक्ति करता हैं लेकिन इसमें कौन सी भक्ति सही है इसको किसी को नहीं पता है। सभी कोई अपनी अपनी इच्छा के अनुसार भक्ति कर रहे हैं। आज के समय इसी बात को लेकर आज बात करेंगे गुजरात के पंडित कौशिक व्यास जी से की सनातन और भक्ति क्या है?
पंडित कौशिक व्यास कहते हैं की हमे गर्व है कि हम सनातनी हिन्दू हूँ और हम हिन्दू में जो एक ब्राह्मण है हमारा सौभाग्य है। कि जो कर्मकांड करते व हमारे पूर्वजनों में कुछ ऐसा बड़े लोगों ने जो पुण्य किया है की हमको ब्राह्मण जाति में जन्म मिला है।
सनातन धर्म इसलिए कि हम ब्राह्मण हैं तो हमे सनातन धर्म की रक्षा करना चाहिए इसीलिए हमको गर्व है कि सनातन में पहले वो आते हैं जो गाय की रक्षा करते हैं इसलिए हम सनातन धर्म में बोलते हैं कि ये हमारी संस्कृति है ये ऋषि मुनियों की परम्परा है और सनातन धर्म में पूजा पाठ इतय्दी करते हैं इसकी एक पद्धति होती है जो सनातन धर्म को मानता है। वो गयात्री माँ की उपासना इतय्दी करते हैं।
प्रश्न:- सगुण भक्ति और निर्गुण भक्ति क्या है ?
उत्तर:- सगुण भक्ति ये है कि जो लोग मूर्ति पूजा करते हैं कहते हैं की यदि आपको कोई पुण्य चाहिए तो भगवन की पूजा करनी चाहिए मूर्ति पूजा में आप देखतें हैं कि भगवन हैं तो भगवन दिखेंगे आपकी श्रद्धा जो है कि ‘देवो भूत्वा देवं यजेत्’ जो कोई शिव की पूजा करता है दुर्गे माँ की पूजा करता है और कहते हैं की कलयुग में स्वयं देवी देवता है पृथ्वी में ऐसी भक्ति को सगुण भक्ति कहते हैं।।
और बाद में आध्यात्मिक बोल सकते हैं कि मानस चर पूजा जो पढ़न करते हैं और पुस्तक वाचते हैं। और कहा भी जाता है की मानसिक शांति लेने के लिए कोई शुभ स्थल में जाऊंगा तो आध्यात्मिक हो जाऊंगा वो निर्गुण भक्ति में आती है
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