Home History एनर्जी हीलिंग क्या है क्यों करानी चाहिए ?

एनर्जी हीलिंग क्या है क्यों करानी चाहिए ?

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एनर्जी हीलिंग क्या है क्यों करानी चाहिए ?

प्रश्न:- आभा झा ने एनर्जी हीलिंग में क्यों और कब अपना पैशन बनाया ?
उत्तर:- जीवन में कई चीजे प्लान नहीं होती हैं । लेकिन जो पैशन होता है उस पैशन को लेकर आप जब चलते हैं। तो रास्ते में कई मुकाम ऐसे चले आते हैं। कि आपको बाद में पता चलता है कि शायद आप बने ही इसी काम के लिए थे। तो आभा झा जी ने २०-२२ साल पहले एजुकेशन सेक्टर में देने के बाद सबसे पहले इन्होने अपना टीचिंग पैशन बनाया था और अभी भी एक लेवल पर टीचिंग कर रही हूँ। जब मैं ट्रेनिंग प्रोग्राम्स कर रही होती हैं।
मैं ये एनर्जी हीलिंग सीखा रही हूँ। तभी भी टीचिंग हो रही है। लेकिन ये 2015 में मेरी इस एनर्जी हीलिंग के काम में एंट्री हुयी। लेकिन इससे पहले 2009 से लेकर 2024 तक ऐसे ट्रम थे जब मैं डिप्रेशन से जूझ रही थी। उसी दौरान मैं शैलूशन ढूढ़ने लगी की क्या करूं। तभी मुझे एनर्जी हीलिंग के विषय में पता चला तब मैंने खुद अपनी एनर्जी हीलिंग करवाई। और वो एक मेरा समय था जब मैंने खुद को पाया वो मेरी जर्नी थी। और 2014 में जब ये रास्ता मिला तो निरंतर एक साल एनर्जी हीलिंग को सीखा। मैंने एनर्जी हीलिंग किसी और के लिए नहीं खुद अपने को करने के लिए सीखा था । फिर इसके बाद उस पर काम करने लगी।।

प्रश्न:- ईगो क्या है ?आपकी बात से कुछ लोगों को फर्क नहीं पड़ता है या कुछ लोगो को फर्क पड़ता है।
उत्तर:- आपको पता होगा कि ईगो बोलते ही न हमारा सबसे पहले ट्रिगर होता है। नेगेटिव ट्रीट और इसको हम मानने को भी तैयार नहीं होते हैं। डिप्रेशन बिलकुल सही है। मैं कहना चाहूंगी कि ईगो बेसकिली समझना। अगर हम समझे तो ईगो हर इंसान में होता है। और किसी के साथ भी हम अपने आपको डिफिईन कर देते हैं। कि मैं ऐसा हूँ। ऐसा नहीं हूँ। बस यही तो ईगो है। उससे कुछ भी अलग आ जाते हैं। तो उसे हम कभी स्वीकार नहीं करते हैं। तो आप हमेशा इस बात से डिसेंटीफाइड रहेगें।
आप देखें गे कि जो लोगो में ये अहम् नहीं होता है वो किसी के साथ भी एडजेस्ट हो जाते हैं उनकी चीजों को अपना लेते हैं। कोई भी अड़चन नहीं होती है उनके पास
लेकिन वही ईगो वाले इंसान में ये सभी अड़चने आती हैं।

प्रश्न :- ऐसे कौन से स्पेसिफिक रीजेन और सिम्टम्स होतें हैं जब आपको लगता है कि आप डिप्रेशन में जा रहे हैं ?
उत्तर:- स्पेसिफिक रीजेन पर्सन तो पर्सन अलग अलग हो सकते हैं। लेकिन रुट कि जो हमने बात करी है यह एक जड़ है। कही न कही हर रीजन के नीचे भी रीजन होता है और बात करें सिम्टम्स की तो सबसे पहले तो डिप्रेसन को हम बीमारी मानना बंद कर दें। ये स्टेट ऑफ़ माइंड है। जहाँ पर हमारा डाटा जो है न वो ओवर लोडेड हो चूका है तो वो प्रोसेस कर ही नहीं पा रहा है कुछ भी। हम समझ नहीं पा रहे हैं। अपने आपको। क्यूंकि करना कुछ चाह रहे हैं और कर कुछ रहे हैं। सबसे पहले सबसे बड़ी बात ये है कि आप खुश नहीं शांति नहीं है मन मे।
हम इस दौरान अपने हालत से भागने की कोशिश करते हैं।
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