भारत मेरे साथ चैनल में स्वागत है। आज अंतस सेवा संस्थान ने अंतस उत्सव 2026 को रखा गया है। जो दिनाँक 5 जनवरी 2026 दिन सोमवार को त्रिवेणी कला संगम मंडी हाउस नई दिल्ली में आयोजित किया गया है। और इसमें पद्म विभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्रा जी को समर्पित एक भावपूर्ण संगीत श्रद्धांजलि और उत्कृष्टता पुरस्कार समारोह है। इसके मुख्य अतिथि पंडित रामकुमार मिश्रा तबला वादक हैं। और अतिथि कलाकार डॉ. इंद्रेश मिश्रा पद्म विभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्रा जी गुरु जी के शिष्य भी हैं।
डॉ इंद्रेश मिश्रा जी का व्यक्तव्य
सभी रसिक सुधी श्रोता एवं हमारे गुरु परिवार से हमारे पूज्य गुरुजी के स्वनाम धन्य विश्वविख्यात पंडित रामकुमार मिश्राजी जो हम सबके अभिभावक है हमारे पूज्य पिताजी है मातापिता दोनों आये हैं सोनभद्र से, और यहा बहुत सारे संगीत जगत दिग्गज लोग सभी को मै डॉ इंद्रेश मिश्रा प्रणाम कर रहा हूँ। सबसे पहले। ये किसी के लिए भी बहोत ही उसका फर्ज बनता है की अगर उसका उस्ताद उसका गुरु उसका मार्ग दर्शक अगर संसार से चला जाता है तो वैसे तो गुरु मरते नही है गुरु की जो ऊर्जा है ना वो संसार में रहती ही है जो उसको नमन करता है अपने जीवन अनुसरण करता ध्यान धरता है गुरु के चरणो का।
ध्याम मूलं गुरुर मूर्ति, पूजा मूलं गुरु पदम्।
मन्त्र मूलं गुरुर वाक्यं मोक्ष मूलं गुरु कृपा॥
जो शिष्य गुरु के अस्तित्व को याद करता है और गुरु के चरण का जो ध्यान करता है प्रणाम करता है जो उनकी बातों का अध्यन करता है। उनके बताये हुए रास्तो पर चलता है तो वो सब शब्द जीवन में गुरु की कृपा से आने लगती है ऐसा मैंने गुरुजी से सुना था आज प्रत्यक्ष नही है और लेकिन उन्होने अपने पूरे जीवन काल में अद्भुत गायन अद्भुत मंच का उन्होने ऐसा गाना बजाना लोगो को सुनाया और सिर्फ शास्त्री संगीत नहीं, शास्त्र के साथ लोक संगीत दादरा, चैती, गजरी, टप्पा, निर्गुण सोहर गाँव में कैसे गाया जाता था रामचरित मानस क्या चीजे होती है बहोत सारा जो संपदा है भारतीय संगीत का उन्होने सब कुछ गाया और एक शिष्य होने के नाते मै जितना भी उनसे ले पाया ये तो मै नही बोल पाऊंगा की कितना ले पाया क्यूकी वो अथा सागर थे और मै छोटे बच्चे में जितनी क्षमता हो सकती है।
एक औपचारिकता के तौर पर मै चाहता हूँ की जो मेरे सपने को साकार किया है अंतस सेवा संस्था ने उसके लिये मै अंतस सेवा संस्थान का एक सम्मान करना चाहता हूं
तो चाहता हूं कि मेरे तरफ से एक छोटा सा सन्मान जो आपने हमारे गुरु के लिए हमारे संगीत जगत के इतना सुंदर आयोजन और बहोत कम समय में आपने इसे आयोजित किया है और ये बिलकुल मै आपको बताऊ की किसी भी काम को करने के लिए बहोत सारी चीजों की जरुरते पडती है और ये पहली बार ऐसा हो रहा है कि संगीत का कार्यक्रम और सभी गुनी जनो का सम्मान हो रहा है। हर विद्यार्थी का सपना होता है हमारा भी सपना की गुरु के कर सके सबसे पहलेे की भैया करना चाहता हूँ सबसे पहले पंडित राम कुमार भैया ने आश्वासन दिया तुम करो हमें आएंगे। वहीँ से ये सिलसिला शुरू हुआ और फिर जो सभी ने मिल करके सहयोग कर के आज इस मुकाम पर हैं। और आप सभी लोग जुड़े। और इस परम्परा को बचना एक शिष्य का धर्म है और सभी गुरु का सपना होता है कि उसकी गयाकी उसकी शिक्षा उसके शिष्यों में आये। और ये प्रयास रहे गा की शिक्षा आगे संगीत के क्षेत्र में लेके पढ़े।








डॉ. इन्द्रेश मिश्रा का परिचय
डॉ. इन्द्रेश मिश्रा एक संगीत परंपरा से जुड़े परिवार से आते हैं। एक प्रतिष्ठित संगीत परिवार में जन्मे, उनका संगीत की दुनिया में सफर बहुत ही कम उम्र में शुरू हो गया। उनका प्रारंभिक वोकल प्रशिक्षण प्रसिद्ध कलाकार पंडित उमा नाथ मिश्रा के मार्गदर्शन में तथा उनकी माता से सलाह के साथ हुआ। बाद में, उन्होंने प्रसिद्ध बनारस घराने के गुरु और विश्व विख्यात पद्म विभूषण डॉ. पंडित छन्नुलाल मिश्रा के मार्गदर्शन में अपने संगीत कौशल को और निखारा।
डॉ. मिश्रा का संगीत भंडार बनारस घराने की समृद्ध और जटिल परंपराओं को समेटे हुए है, जिसमें ख़याल, तराना, ठुमरी, दादरा, तप्पा, चैती, कजरी, सावनी, बरहमासा, सोहर, रामचरितमानस, साहित्य-आधारित गायन और लोक संगीत शामिल हैं। उनकी बहुमुखी प्रतिभा उन्हें नई गायन शैलियों को सहजता से अपनाने की क्षमता देती है, और उनकी कला का रहस्य उनके अनुपम लय और संगीत के साथ सामंजस्य में निहित है।
सालों से, डॉ. इन्द्रेश मिश्रा ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कई प्रतिष्ठित मंचों को अपनी उपस्थिति से आलोकित किया है, जिससे उन्होंने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, अपने तुरंत जुड़ाव से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्हें ऑल इंडिया रेडियो, नई दिल्ली से हिंदी संगीत में “ए” ग्रेड कलाकार का प्रतिष्ठित खिताब प्राप्त है, जो भारत सरकार द्वारा प्रदान किया गया सम्मान है। इसके अलावा, उनके शैक्षणिक प्रयास उन्हें हरियाणा के रोहतक में स्थित महार्षि दयानंद विश्वविद्यालय तक ले गए, जहां उन्होंने प्रदर्शन और ललित कला में शोध (पीएच.डी) किया और दर्शनशास्त्र के डॉक्टर (डॉक्टरेट) का विशिष्ट खिताब प्राप्त किया। अपने प्रारंभिक वर्षों में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में उन्होंने न केवल बैचलर ऑफ म्यूजिक (बी. म्यूजिक) और मास्टर ऑफ म्यूजिक (एम. म्यूजिक) की पढ़ाई की, बल्कि सुर संगीत में लगातार 5 वर्षों तक गोल्ड मेडल जीतने का अद्वितीय सम्मान भी प्राप्त किया। उनका संगीत यात्रा बचपन में विभिन्न गायन प्रतियोगिताओं और मंच प्रस्तुतियों में भाग लेकर शुरू हुई, जिससे उन्हें प्रमुख व्यक्तित्वों का आशीर्वाद और मान्यता मिली। डॉ. इन्द्रेश मिश्रा के योगदानों को सरकार और निजी संगठनों द्वारा मान्यता दी गई है, जिसमें शामिल हैं|
डॉ. इंद्रेश मिश्रा के योगदानों को सरकारी और निजी संगठनों द्वारा स्वीकार किया गया है, जिनमें संस्कार भारती, रोटरी क्लब, संगीत नाटक अकादमी नई दिल्ली, स्पीक मैके, और साहित्य कला परिषद शामिल हैं। वह अपने ज्ञान को साझा करना जारी रखते हैं, प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में शोध पत्र प्रस्तुत करके, विश्वविद्यालयों और संगीत छात्रों के लिए सेमिनार, कार्यशालाएँ और व्याख्यान आयोजित करके। उनके प्रदर्शन सम्मानित स्थलों पर हुए हैं जैसे कि राष्ट्रपति भवन, जहाँ उन्होंने महामहिम राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी की उपस्थिति में प्रदर्शन किया, और राजघाट, जहाँ माननीय श्री नरेंद्र मोदी (प्रधान मंत्री) के राष्ट्रीय कार्यक्रम में उन्होंने प्रस्तुति दी।
और आज 05 जनवरी 2026 दिन सोमवार को अंतस सेवा संस्थान के माध्यम से अपने गुरु पदम् विभूषण से सम्मानित स्व श्री पं छन्नूलाल मिश्रा जी कि पुण्यतिथि में में उनका नाम पर संगीत के क्षेत्र में एक सम्मान भी रखा गया है जो उनके सौपुत्र पं राहुल छन्नूलाल मिश्रा को तबला वादक में प्रदान किया जाता है। और इसी के साथ में डॉ इंद्रेश मिश्रा और पं राहुल छानुलाल की प्रस्तुति भी होती है।
जिसे आप भारत मेरे साथ छन्नील के माध्यम से पूरी प्रस्तुति का आनंद ले सकते हैं
प्रस्तुति को देखने के लिए निचे दिए गए लिंक को क्लिक करें।




