रंगकर्मी आलोक शुक्ला ने बताया कि एक रंगमंच के कलाकार को हमेशा सकारात्मक होना चाहिए क्योंकि यदि वह कलाकार सकारात्मक नहीं है, हमेशा नकारात्मक रहता है।हमेशा गलत सोचता रहता है तो वो एक्टिंग मत करें?वो कलाकारी नहीं कर पाएगा क्योंकि फिर उसके साथ में बहुत ही संघर्ष है। अगर कलाकार के अंदर सकारात्मकता है कि मुझे कलाकारी ही करना है।तब आप आगे बढ़ जाएंगे।क्योंकि एक्टिंग छोड़कर और कुछ करना ही नहीं है यदि कोई चीज़ आपको आंदोलित नहीं कर रही है।तो उसके लिए संघर्ष करना नहीं चाहिए आपको?क्योंकि आप उससे संघर्ष नहीं कर पाएंगे अगर आप रंगमंच पर मंचन करना चाहते हैं तो बहुत सारे छोटे छोटे संस्था है। बहुत सारे कलाकार वो संस्था में एक्टिंग करते हैं, रंग मंच करते हैं, तो आप रंग मंच उससे जुड़कर कर कीजियेगा और देखिएगा कि आप कितना सीख सकते हैं।कितनी कला अपनी निखार सकते हैं। यदि कुछ लिख सकते हैं तो फिर किसी की भी जरूरत नहीं है। आप किताब पढ़िएगा और प्रत्येक दिन कुछ न कुछ लिखियेगा।वहाँ पर रंगमंच में अपने आपको एक्सप्लोर कीजिएगा कि आप कितना कर पा रहे है, कितना आगे बढ़ पा रहे हैं? यदि इसके बाद आपको सिनेमा में जाना है तो रंगमंच को वहीं पर छोड़ दीजियेगा। सिनेमा की तैयारी कीजिएगा?क्योंकि यदि आप दोनों चीजो में करेंगे इधर रंगमंच से 17 -20 -25 नाटक रंगमंच में कर रहे हैं, खोज रहे हैं तो उस समय पर बाद करना होगा। आपका दोनों की एक्टिंग जो है, दोनों की अलग अलग है।तो यदि दोनों करना चाहोगे तो भटक जाओगे, लेकिन आप का मकसद है लक्ष्य। आपने अपना लक्ष्य निर्धारित कर किया है कि नहीं? मुझे ये करना है तो वो करना पड़ेगा तो उसके लिए आपको अपने बुद्धि को अपनी मानसिकता को सकारात्मक रखना।
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Note: – शो पर बोली गयी कोई भी बात चैनल के द्वारा लिखित नहीं है जो भी अतिथि या प्रवक्ता बात कर रहे हैं वो उनके खुद की विचारधारा हैं भारत मेरे साथ चैंनल उसके लिए जिम्मेदार नहीं है।
अलोक शुक्ला के साथ रंगमंच में सकारात्मक की शक्ति को प्रेरणादायक बनाये।
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