Monday, January 26, 2026
Google search engine
HomeEventsमाँ महाकाली के स्वरूपों का वर्णन |

माँ महाकाली के स्वरूपों का वर्णन |

विषय:- माँ महाकाली के स्वरूपों का वर्णन
सीरीज़:– लाइव // #नोफिलटर // एपिसोड:- २
प्रवक्ता:- आचार्य जितेंद्र चतुर्वेदी वाराणसी उत्तर प्रदेश

शीर्षक:- इस विषय पर भैरव तंत्र विमर्श, 10 महाविद्या और देवता भी तंत्र के साथ।तंत्र एक विज्ञान है, क्योंकि विज्ञान एक प्राचीन पद्धति है, और विज्ञान ज्ञान कोआध्यातिमकता से जोड़ना।
माँ महाकाली के विशाल स्वरूप को कैसे देखें और समझें।

तंत्र विज्ञान और अध्यात्म इस विषय में तंत्र विज्ञान का भगवती माँ काली से ही आरंभ है। तंत्र की प्रथम देवी है। माँ काली और माँ काली के स्वरूप का वर्णन काल के स्वरूप से भी बेहद हैं, क्योंकि माँ काली स्वयं प्रकृति को निर्धारित करती है।और स्वयं ही प्रकृति का विलय भी करती हैं। दुर्गा सप्तशती के सप्तम अध्याय में भगवती माँ काली का स्वरूप का बड़ा ही बेहद वर्णन है और मातृत्व भाव से पूरी तरह से परिपूर्ण हैं।

काली काल रूपा च सोम्य रूपा सनातनी
जब मा काली विकराल रूप धारण करती है तो रक्तबीज जैसे अवसरों का भी वध करती है। चण्डमुण्ड जैसे घातियों का घात करती है वो और माँ काली का स्वरूप त्रिकोणमय है। वो धर्म, अर्थ और काम?तो जो सप्तसती में जो वर्णन आया माँ भगवती का, तो भगवती सौम्य रूप है और वो प्रकृति है।
कालरात्रिर्महारात्रिर्मोहरात्रिश्‍च दारुणा।
त्वं श्रीस्त्वमीश्‍वरी त्वं ह्रीस्त्वं बुद्धिर्बोधलक्षणा॥
लज्जा पुष्टिस्तथा तुष्टिस्त्वं शान्तिः क्षान्तिरेव च।
खड्गिनी शूलिनी घोरा गदिनी चक्रिणी तथा॥
शङ्खिनी चापिनी बाणभुशुण्डीपरिघायुधा।
सौम्या सौम्यतराशेषसौम्येभ्यस्त्वतिसुन्दरी॥
तो वो जो परमेश्वरी है तो वो देखने में तो बड़ी भयावह है। इस रूप को देखने के बाद आदमी एकदम अध् विक्षिप्त हो जाता है और काली की परंपरा में जब तक अपने आप को पुत्र भाव में समाहित नहीं करेंगे तब तक माँ भगवती के मातृत्व भाव का अवलम्बन नहीं मिलेगा आपको।जब माँ काली के स्वरूप में विचार करते हैं तो उनका नाम मात्र से ही लगता है कि अति भयंकर है।वह कालों की काल होंगे। इनके स्वरूप में सारा कालखंड समाहित हो जाता है।

रामकृष्णा परमहंस को शरणागत देने वाली माँ काली का रूप।
तो मा काली शब्द सही लगता है की मा काली, कितनी विकराल, विराट और कितनी?अस्तित्व को समाहित किए हुए हैं। लेकिन माँ काली के लिए केवल एक ही शब्द पर्याप्त है कि माँ काली के अंदर जो काल से भी संरक्षित करके और जो काल को ही निगल जाए और काली शब्दों में दो अर्थ होते हैं एक काल याम और एक काल समय।
इसमें काल का अर्थ समय होता है।जिसमें कालचक्र कहते हैं, माँ काली का कालचक्र को भी अपने में समाहित कर लेती है और माँ काली को संघार रूप में देखा जाता है। संघार के क्रम में चिप संघार होगा, सृष्टि भी होगी क्योंकि सृष्टि भी वही करती है।उसी स्वरूप में जब सृष्टि करती है, तब रामकृष्णा परमहंस जैसे महाऋषियों को सानिध्य में देती है और जब काल बनती है तो कालो का भी निग्रह करती है।

क्या महाकालीका वैराग्य से कोई संबंध है?
इसमें का मतलब जो है जहाँ किसी भी प्रकार का राग ना हो। राग का मतलब लोभ, मोह, अहंकार तो इन सब चीजों को जब हम लोग दृष्टि में ले आते हैं वैराग में ही थे क्योंकि वो राम ने 14 वर्ष तक तपस्या की, माँ भगवती काली की आराधना किया उन्होंने उतने दिनों तक जीतने दिन वो बनवास में हैं, उतने दिन तक माँ काली की भी आराधना की और माँ काली तो वैराग में ही ली जाती है।माँ काली राग से मुक्त करती है इसलिए आप बनारस में भी देखेंगे तो वो विश्वेश्वरी के रूप में विराजमान है।जो ज्ञान रूप में वहाँ पर विद्यमान हैं।
इस पूरे अध्याय को माँ काली के स्वरूप को माँ काली को वैराग्य से जोड़ने के और रामकृष्णा परमहंस के विषय में पूरी महत्वपूर्ण जानकारीयों को समझने के लिए आचार्य जितेंद्र चतुर्वेदी जी, जो बनारस से है भारत में साथ चैनल के द्वारा नीचे दिए गए लिंक को क्लिक करें

Note: – शो पर बोली गयी कोई भी बात चैनल के द्वारा लिखित नहीं है जो भी अतिथि या प्रवक्ता बात कर रहे हैं वो उनके खुद की विचारधारा हैं भारत मेरे साथ चैंनल उसके लिए जिम्मेदार नहीं है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments