विषय:- “जसदीप पर एक झलक: प्रेरणादायक उद्योग नेता”
सीरज:-नारी शक्ति
अतिथि:- जसदीप कौर
शीर्षक:- जब इमोशनल हटते तब हमारे इंटेलिजेंस काम करते हैं।
चलिए जानते हैं जसदीप कौर की अद्भुत यात्रा के बारे में, जो एक सच्ची डिजिटल डायनमो और मेटल मास्ट्रो हैं। हमारे साथ जुड़िए और उनके टेक और बिज़नेस में बहुआयामी कौशल की खोज कीजिए, और उनके प्रेरणादायक सफलता के सफर को देखें। जानिए कि कैसे जसदीप की इनोवेटिव सोच और स्ट्रैटेजिक जीनियस ने उन्हें डिजिटल मार्केटिंग और मेटल फैब्रिकेशन दोनों में उत्कृष्ट बनने में मदद की। तैयार हो जाइए एक असाधारण उद्यमी की कहानी से प्रेरित होने के लिए, जो सभी मुश्किलों को पार करके दुनिया में अपनी छाप छोड़ रही हैं।
किसी गेम को बनाने के लिए प्रक्रिया क्या होती है ?
जैसे कि हम बात करते हैं टिकटेक टू की जो सबने खेली हो गी इसमें एक ग्रिड होगी तो उस ग्रिड के अंदर कैसे हम बनाये की जो सामने वाला खिलाड़ी हैं जैसे एक कंप्यूटर का खिलाड़ी हैं और इसके साथ में एक और खिलाड़ी हैं जो गेम खेल रहा है तो उस खिलाड़ी से जितना है मुझे।तो हमें एक पैटर्न, एक ग्राफ बनाना होगा कि जो भी वो मोमेंट खेल रहा है, जिंस तरीके से वो खेल रहा है।एक काउंटर मूव उसके हमारे पास होने चाहिए तो उसके स्टेप्स लिखते हैं।इसके एल्गोरिथम डिजाइन करते हैं।की अगर उसने ये मोमेंट लिया है तो हमें क्या मूव करना हमारे लिए वो मूमेंट्स सुरक्षित होगा? और हमारे विनिंग ट्रिप्लेट्स क्या क्या हो सकते हैं ?और वो खिलाड़ी उसमें आता है की नहीं आता है। तो इसमें बहुत स्ट्रैटेजी बनानी पड़ती हैं।और फिर हम उस गेम के लिए प्रोग्राम लिख सकते है।।
जसदीप कौर गेम के साथ संगीत को कैसे प्रबंध करती है?
मैं जसदीप कौर बहुत ही हद तक काफी ज्यादा परिणाम तक मैं अपने आप को भावनात्मक ही रखती हूँ। मतलब की इमोशनल ही रख।क्योंकि मुझे छोटी सी चीज़ बहुत खुश कर देती है और छोटी सी चीज़ बहुत दुखी कर देती है।और इसी कारण के वजह से मैं डिप्रेशन तक गयी।लेकिन जब मैं उस डिप्रेशन से बाहर निकली तब मैंने थैरेपी ली और जब मुझे समझ में आया कि इसको अलग नजरिया देखने को मिला। तब मुझे समझ में आया कि हमे भावनाओं के साथ नहीं मुझे भावनाओं को कैसे संभाल के रखना है अपनी? और अपने लाभ के लिए भावनात्मक रूप से उपयोग करें।और ऐसी चीजों का भावनाओं से थोड़ा सा अलग करके अपनी भावना के साथ खेलकर उसमें लाया गया। क्योंकि जब हम अपनी भावनाओं के साथ रोना आ रहा तो वो दुख रही है तो रोना आ रहा है तो रोएंगे खुशिया तो हसना है तो हसेंगे तब इन चीजों से अलग होकर हम अपने आप को संगीत में गेम में या फिर किसी भी विभाग में जाएंगे, उसको हम अच्छी तरीके से कर सकते।
जो सब करते हैं यारा, वो क्यों हम तुम करें?
यूँही नफरत करते काहे को हम लड़े?
घरवालों से टीचर से भला हम क्यों डरें?
यहाँ के हम सिकंदर चाहे तो सबको रख लें अपनी जेब के अंदर।
और हम से बच के रहना मेरे यार………
भारत मेरे साथ चैनल के माध्यम से भारत मेरे साथ से सुरभि सप्रू और जसदीप कौर से वार्तालाप से गेम को संगीत के विषय में जानने के लिए नीचे दिए गए लिंक को क्लिक करे |




