विषय:- फूलो से बनाते हैं रंग, गुलाल और अगरबत्ती
सीरज:- ग्रीन स्पीक
अतिथि:- रोज़ीना सुलेमान
शीर्षक:- रोज़िना सुलेमान की अविश्वसनीय यात्रा; पुनर्चक्रण और सशक्तिकरण के माध्यम से जीवन बदलना –
जो मंदिरों में चढ़े हुए फूलों को फेंकदिया जाता है उन सभी फूलो को एकत्रित करके उनसे होली में खेलने के लिए रंग, गुलाल, अगरबत्ती, और धूपबत्ती बनाई जाती हैं। इसमें किसी भी प्रकार का केमिकल प्रयोग नहीं किया जाता है।
नमस्कार,भारत मेरे साथ चैनल के सभी दृश्कों तैयार हो जाइए प्रेरित होने के लिए क्योंकि हम अत्यंत प्रभावशाली रोज़िना सुलेमान के साथ ग्रीन स्पीक की अद्भुत दुनिया में डुबकी लगाने जा रहे हैं। वह वास्तविक जीवन की सुपरहीरो की तरह हैं, जो हमारे ग्रह को बेहतर बनाने के लिए पुनर्चक्रण और लोगों को सशक्त बनाने के कार्य में जुटी हैं। इस विशेष संवाद में, सुरभि सप्रू रोज़िना के साथ बैठकर ईस्ट दिल्ली में POWHER चैरिटेबल ट्रस्ट के पीछे की जादूगरी को उजागर करती हैं। वे आपको एक रोमांचक यात्रा पर ले जाएँगी, जिसमें यह दिखाया जाएगा कि वे महिलाओं और विशेष रूप से सक्षम मित्रों की जिंदगी को बेहतर बनाने में कैसे मदद कर रही हैं। रोज़िना की कहानी भावनाओं से भरी रोलरकोस्टर की तरह है – PCI इंडिया में पूर्व काउंसलर के रूप में अपने कार्यकाल से लेकर POWHER की प्रमुख महिला के रूप में अपनी भूमिका तक। वह दिखाएँगी कि शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल प्रशिक्षण ऐसे सुपरपॉवर्स हैं जो सबकुछ बदल सकते हैं। इसके अलावा, पुनर्चक्रित प्लास्टिक से बनाए जा रहे अद्भुत उत्पादों को देखकर आप मंत्रमुग्ध हो जाएंगे – यह ऐसा है जैसे कचरे को खज़ाने में बदल दिया गया हो। तो, अपनी केप पकड़ें और इस महाकाव्य यात्रा में हमारे साथ जुड़ें और POWHER के मिशन को बचाने के बारे में सब कुछ जानें।
रोजीना सुलेमान NGO के माध्यम से क्या क्या कार्य करती है?
रोजीना सुलेमान 15 वर्ष की उम्र से प्रकृति और समाज से जुड़े हुए काम करना शुरू कर दिया था। उनको प्रति और समाज से बहुत ही लगाव था और वो काम करने के लिए उन्होंने एक NGO समुह भी बनाया। सबसे पहले उन्होंने चुना इसके बाद बनाया।उन्होंने NGO समूह में रहकर गरीब बच्चों को पढ़ाना, उनके लिए स्कूलों में शिक्षा के लिए प्रवेश दिलवाना, समाजिक कार्य करना गरीबों को रोजगार दिलवाना इत्यादि काम करती थी।और इन सभी के साथ साथ हैं। जिलों में काम करने के साथ साथ रोजीना सुलेमान अपनी शिक्षा भी प्राप्त कर रही थी। उन्होंने बैचलर और मास्टर डिग्री सोशल वर्क से ही लिया। फिर उन्होंने सन् 2019 में एक NGO समूह का निर्माण कराया, जिसका नाम पावर एनजीओ रखा। इसमें उन्होंने महिलाओं और दिव्याँग लोगों को साथ मिलकर काम करती है और सभी को रोजगार देने के लिए भी प्रयास करती है।और।सभी लोगों के साथ जितना भी वेस्ट होता है, आस पास का जो भी सामान होता है, जो प्रकृति से जुड़ी होती हैं, उन सभी चीजों को एकत्रित करके वस्तुओं के एकत्रित कर कर बहुत सी चीज़ो का वो निर्माण भी करती है।
मंदिर के फूलों से बनाते है रंग अगरबत्ती और धूपबत्ती।
होली में खेलने वाला जो रंग और गुलाल होता है जो हम मंदिरों में चढ़े हुए फूलों से बनाते है।इसमें क्या होता है कि जीतने भी आसपास के क्षेत्रों में जो मंदिर होते हैं वहाँ से फूलों को एकत्रित किया जाता है फिर सुखाया जाता है। फिर उसको काटा जाता है।फिर उन फूलों की कटिंग सेटिंग की जाती है। अच्छी तरह से साफ सफाई की जाती है। इसके बाद होली का रंग बनाया जाता है।इसमें किसी भी प्रकार का कोई केमिकल नहीं होता है और इनके साथ मे फूल से अगरबत्ती और धूप बत्ती भी बनाई जाती है।
रंग बनाने के लिए फूलों के अपशिष्ट प्रबंधन की प्रक्रिया कैसे होती है ?
जो फुल मंदिर में चढ़े हुए होते हैं वो तो एकत्रित कर लिए जाते हैं। उसमें किसी भी प्रकार का कोई केमिकल प्रयोग नहीं किया जाता है क्योंकि जो फूलों के रंग होता है वो नारंगी छिलके का पाउडर होता।वो बिल्कुल सफेद हो जाता है। सूखने पर वह बिल्कुल सफेद हो जाता है। उसके बाद हल्दी का प्रयोग किया जाता है। पीले रंग के लिए साथ में गेंदे के फूल भी मिलाए जाते हैं। नारंगी वाला जो हमारा रंग है, उसमें नारंगी फ्रूट ग्रेड रंग होता है और साथ में नारंगी के पीस के पाउडर होता है।साथ में सुगंध साथ में प्रयोग की जाती है लेकिन ये प्राकृतिक सुगंध होती है। इसमें होली का रंग और गुलाल बनता है।और अगरबत्ती में हमारे फूलों का पाउडर होता है जरूरी तेलऔर ब्रॉक प्रयोग होता है इनको सभी को मिला कर ये सभी चीज़े बनाई जाती हैं |
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फूलो से बनाते हैं रंग, गुलाल और अगरबत्ती |
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