विषय:- हिंदी भाषा की चुनौतियाँ और संघर्ष
सीरीज़:- Live // No filter
अतिथि:- वरिष्ठ साहित्यकार सुधाकर पाठक / डॉ पूनम माटिया
शीर्षक:- हिंदी भाषा बोली साहित्य और हिंदी पखवाड़ा पर चर्चा!
नमस्कार, भारत मेरे साथ चैनल के सीरीज लाइव नो फिल्टर पर आप सभी दर्शकों का स्वागत है।आज का विषय है हिंदी भाषा की चुनौतियां और संघर्ष। इस विषय पर चर्चा करेंगे भारत मेरे साथ चैनल से सुरभि सप्रू और उनके साथ जुड़ेंगे वरिष्ठ साहित्यकार सुधाकर पाठक और वरिष्ठ साहित्यकार डॉ पूनम माटिया जी। हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में हिंदी पखवाड़ा या हिंदी सप्ताह ये एक सप्ताह तक चलता रहता है।क्या हिंदी मात्र?इतने में ही बंध कर रह गई है।जो कुछ दिन या कुछ घंटे या कुछ सप्ताह के लिए ही मानी जाती है। सिर्फ एक पर्व जो हिंदी दिवस के नाम से जाना जाता है उसके लिए तक सीमित रह गई है।इन सभी बातों को लेकर हिंदी भाषा की बोली, हिंदी भाषा का साहित्य, हिंदी भाषा की कविताएँ, हिंदी भाषा पर नौकरी के विषय में बात की जाएगी। भारतवर्ष में हिंदी भाषा का बहुत बड़ा महत्त्व है।भारत की जो मातृभाषा है वो हिंदी है, इसके संस्कृति और यह भाषा है जो मातृभाषा है, जो पूरे भारत में जानी जाती है।ये धीरे धीरे से विलुप्त हो रही है।क्या कारण हो सकता है इस विषय पर आज चर्चा की जाएगी।क्योंकि जो विषय है यह किसी हिंदी या पखवाड़े या किसी सप्ताह या माह के लिए क्रेंदित ना होकर हर दिन इस भाषा को दिवस के रूप में मनाया जाना चाहिए क्योंकि भारत की संपर्क भाषा भी हिंदी ही है।क्योंकि हिंदी भाषा जो है ना इतना संघर्ष क्यों कर रही है? दूसरी भाषा क्या उपेक्षा?दूसरी भाषाएं जो है वो अपना घर बना रही है, धीरे धीरे से और हिंदी भाषा रोज़ का रोज़ दब रही है। विलुप्त हो रही है, इसको कोई पढ़ना नहीं चाहता। इस पर काम नहीं करना चाह रहा है। आज इस विषय पर साहित्कार सुधाकर पाठक जी और डॉ पूनम माटिया जी से चर्चा की जाएगी।
किस समय में हिंदी भाषा की चुनौतियां किया? शुद्ध हिंदी से देवनागरी और देवनागरी से रोमन तक का सफर।
आज के समय में।जो हिंदी को लिखा जा रहा है।वो देवनागरी या फिर रोमन शब्द में लिखा जा रहा है। शुद्ध हिंदी लिखना अब धीरे धीरे समाप्त हो गया है।इसको ज्यादा नहीं कह सकते हैं क्योंकि देवनागरी कैसे बढ़ रही है, इस पर तो विश्लेषण जिन्होंने किया है वहीं इसको पूरा बता सकते हैं जिन्होंने अध्ययन किया है। हाँ, लेकिन जहाँ तक ऐसा है कि हम सभी लोग आम भाषा लिखने लग गए हैं। तो देवनागरी तो कहीं ना कहीं अब रोमन शब्दों में भी बदल गई है।आज के समय में जो विद्यालयों में हिंदी पढ़ाई जा रही है वो रोमन शब्द या फिर देवनागरी में पढ़ाई जा रही है। ज्यादातर रोमन शब्द है आज कल के अखबार भी जो है रोमन शब्द में लिख रहे हैं।मतलब की प्रधानमंत्री को पीएम, मुख्यमंत्री को सीएम इस तरीके से लिखा जा रहा है। डॉक्टर को डॉ लिख कर छोड़ देते हैं।ये अखबारों में पत्रिका इत्यादि में भी लिखा जा रहा है। तो इससे कहीं नहीं।हिंदी की लिपि पर जाकर प्रभाव पड़ रहा है।और यह लिपि धीरे धीरे प्रभावित हो रही है।
हिंदी भाषा की चुनौतियों और संघर्ष के पूरे विषय को जानने के लिए की हिंदी कितनी प्रभावित हो रही है, कितना विलुप्त हो रही है तो भारत मेरे साथ से सुरभि सप्रू केसाथ जो अतिथि जुड़े हैं। डॉ पूनम माटिया वरीष्ठ साहित्यकार और सुधाकर पाठक वरीष्ठ साहित्यकार के माध्यम से जानने के लिए भारत मेरे साथ का नीचे दिए गए लिंक को क्लिक करें।और पूरे विषय को देखें।
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Note: – शो पर बोली गयी कोई भी बात चैनल के द्वारा लिखित नहीं है जो भी अतिथि या प्रवक्ता बात कर रहे हैं वो उनके खुद की विचारधारा हैं भारत मेरे साथ चैंनल उसके लिए जिम्मेदार नहीं है।




