विषय:- Relief, Rehabilitation and many more From Bullet to Ballet Rakesh Handu
सीरीज़:- Live // No Filter
अतिथि:- राकेश हांडू
शीर्षक:- नमस्कार भरा मेरे साथ चैनल की सीरीज़ Live // No Filter में आप सभी दर्शकों का स्वागत है। भारत मेरे साथ चैनल के माध्यम से आज सन 1990 में कश्मीरी से विस्थापित कश्मीर हिन्दू को सहयता सहयोग धन राशि सरकार के द्वारा दी जाने के विषय पर चर्चा करेंगी चैनल की संचालिका सुरभि सप्रू इनके साथ अतिथि हैं कश्मीर से राकेश हांडू जो सामाजिक कार्यकर्ता रहे हैं अब वर्तमान समय में जम्मू & कश्मीर में जनता दल (यूनाइटेड) पार्टी में राकेश हांडू, प्रसिद्ध सामुदायिक कार्यकर्ता, अब JDU (जे&के) में प्रवासी सेल के इंचार्ज और प्रवक्ता के रूप में नियुक्त किये गए हैं। ये अब कश्मीरी ब्राह्मण और सामाजिक कार्य के विषय में आगे चर्चा करेंगे।
वर्ष 1990 में विस्थापित कश्मीर हिन्दू को अभी तक नहीं मिला न्याय !
कश्मीर में जब वर्ष 1990 में बड़े पैमाने पर अन्वेषण या नरसंहार कश्मीर हिन्दुओं पर हुआ था खासकर 19 जनवरी 1990 में। उसके बाद सब लोग वहाँ से निकले उनको नेस्ट डेस्टिनेशन मालूम नहीं थी।और जब उस समय जो लोग निकले तो उनको एक ही सेंट्रल पॉइंट पता था वो था गीता भवन।गीता भवन में लगभग 75 कमरे थे। इसीलिए मैं जमीनी स्तर पर उस समय काम किया क्योंकि लोग बेचारे जो आते थे उनको रास्ता भी नहीं मालूम था कि कश्मीर से पैदल किस तरह छुप छुपाकर बचकर अपने परिवार के साथ अपने माता पिता के साथ गीता भवन तक पहुँच पा रहे थे। उसके बाद उस समय पर सरकार के द्वारा टैक्स लगाए गए क्योंकि लोगों में अचानक से तीन से 4,00,000 तक का जम्मू पहुँच गए, जिनका कोई ठिकाना नहीं है जिनके पास कोई रहने की जगह नहीं है। इसके बाद हम लोग जो जमीनी स्तर पर कर रहे थे तो सरकार के जो निजी आवास थे,उनको खाली करवाए गए और वहाँ पर जीतने लोगों को हो सकता था उतने लोगों को रोका गया।इसके बाद जीतने लोग बचे उनके लिये उसी स्थानों पर।तब्बू मतलब टेंट भी लगवाए गए।और जो लोग कश्मीर से बचकर कश्मीरी ब्राह्मण या कश्मीरी हिंदू वापस आ पा रहे थे, गीता भवन या सरकारी आवास के पास उनको उस टेंट में ठहराया गया।लेकिन बड़ा अफसोस रहा की जो लोग तंबू में थे उनको सांप, बिच्छू, जंगली जानवरों का सामना भी करना पड़ा।और कुछ लोगों को जान भी गंवानी पड़ी। सांप के काटने से, बिच्छू के काटने से इत्यादि।प्रकार के द्वारा।₹500 धनराशि की एक योजना निकाली गई, जिसे रिलीफ भी कहा जाता है।वो धन राशि बढ़ते बढ़ते 2010 तक ₹13,000 हो गयी।
लेकिन वो धनराशि कश्मीरी ब्राह्मणों तक अभी भी सरकार के द्वारा प्राप्त नहीं हो पाया।ये जो धनराशि सरकार के द्वारा नियुक्त की गई थी कि जो कश्मीरी ब्राह्मण स्थापित हुए हैं, कश्मीर से जो बाहर हैं, जो दिल्ली, फरीदाबाद जो दूसरे शहरों में जाकर बसे उनको ये सहयोग प्राप्त होगा जो जम्मू के कैंपो में अभी भी है, उनके लिए थी।परन्तु अभी तक उनको ये धनराशि प्राप्त नहीं हुई है।और जो लोग कश्मीर से आ रहे थे कश्मीरी ब्राह्मण उनको वहाँ पर ठहराया गया।ये जो धनराशि सरकार के द्वारा कश्मीरी विस्थापित ब्राह्मणों के लिए नियुक्त की गई थी।अभी तक ये धनराशि प्राप्त नहीं हुई है।इस विषय को लेकर कश्मीर से राकेश जी सरकार से मांग भी कर रहे। क्योंकि जो लोग कश्मीर थे वर्ष 1990 में निकले हुए थे। उसमें से आज भी लोग कैंपों में जम्मू के रह रहे। उन्हें सरकार के द्वारा किसी भी प्रकार की सहायता प्राप्त नहीं हुई है, ना ही उन्हें कश्मीर में उनके घर उनकी जमीनें वापस मिली है।सामाजिक कार्यकर्ता राकेश हांडू सरकार से लगातार इस विषय में बात कर रहे हैं। इस विषय में चर्चा कर रहे हैं की ये 35 वर्ष का संघर्ष जो कश्मीरी ब्राह्मणों ने झेला है देखा है। ये कब तक उनको मिलेंगे?
इस पूरे विषय को सुनने के लिए भारत मेरे साथ चैनल के माध्यम से सीरीज़ लाइव नो फिल्टर के माध्यम से संचालिका सुरभि सप्रू और राकेश हांडू इस विषय पर तर्क वितर्क करेंगे। को देखने के लिए नीचे दिए गए भारत मेरे साथ चैनल के लिंक को क्लिक करें।चैनल को लाइक, सस्क्राइब, शेयर और कमेंट्स जरूर करें।
Note: – शो पर बोली गयी कोई भी बात चैनल के द्वारा लिखित नहीं है जो भी अतिथि या प्रवक्ता बात कर रहे हैं वो उनके खुद की विचारधारा हैं भारत मेरे साथ चैंनल उसके लिए जिम्मेदार नहीं है।




