विषय: स्त्री विमर्श स्त्री चिंतन अखिल भारतीय साहित्य परिषद महिला साहित्यकार सम्मलेन वड़ताल
सीरीज़:- साहित्य धारा
अतिथि:- डॉ मुक्ति शर्मा
स्थान:- स्वामी नारायण मंदिर वड़ताल अहमदाबाद गुजरात
शीर्षक:- नमस्कार भारत मेरे साथ चैनल की सीरीज़ साहित्य धारा में आप सभी दर्शकों स्वागतः है। साहित्य धारा सीरीज़ में भारत मेरे साथ चैनल हिंदी साहित्य, भाषा, बोली, संस्कृत, शब्द, लेखनी इत्यादि विषय पर बात की जाती है। भारत मेरे साथ चैनल से सुरभि सप्रू स्वामी नारायण मन्दिर वड़ताल गुजरात में महिला साहित्यकार सम्मेलन में भाग लेने के लिए आयी हैं। और महिला साहित्यकार सम्मेलन में कई राज्य और प्रदेश से आयी हुयी कवित्रियोँ से स्त्री विमर्श और स्त्री चिंतन और साहित्य के विषय पर चर्चा करेंगी। इस वक्त महिला साहित्यकार सम्मेलन में आयी हुयी डॉ मुक्ति शर्मा जो कश्मीर से हैं और वर्तमान समय में वो कश्मीर में ही रहती है। और वो साहित्य, कविताएँ, कहानिया के मध्ययम से वहां की समस्या के विषय में लिखती हैं।
प्रश्न: कश्मीर से गुजरात तक के सफर में क्या चुनौतियाँ आयी हैं ?
उत्तर:- कश्मीर से ये जो महिला साहित्य सम्मेलन वदलत गुजरात तक का जो सफर रहा है। यह बहुत ही मेरे लिए अनुभव भरा रहा है। क्योंकि कश्मीर से यहाँ तक पहुंचना ये बहुत बड़ी बात है। और वैसे भी अब कश्मीर के हालात बहुत ही सुधर चुके हैं जो कश्मीर की महिलायें हैं वो दूर दूर तक जा रही हैं। अपने मुकाम को छू रही हैं। और अपनी अलग ही प्रतिष्ठा बना रही हैं।
प्रश्न:- एक साहित्यकार होना कश्मीर में कितना मुश्किल है ?
उत्तर:- साहित्यकार तो अपना जो उसे लिखना होता हैं वो उसे लिखता ही है। उसे वहां की साहित्य संस्कृति समस्या लिखनी है। और जिन चीजों को महसूस करेगा वहां पर जैसा भी होगा तो वो अपनी लेखनी पर उतरे गा ही।और एक साहित्यकार का यह कर्तव्य बनता है जैसे वहां की जो परेशानिया हैं जिन पीड़ा से वो गुजर रहा है और जो दर्द वो महसूस करता है। तो उसको राजनीती से दूर रहकर एक साहित्यकार की दृष्टि से उन चीजों को अपने कलम के माध्यम से उजागर करना चाहिए।
नोट:- सुरभि सप्रू और डॉ मुक्ति शर्मा से स्त्री विमर्श और स्त्री चिंतन पर पूरी सुनने के लिए नीचे दिए गए भारत मेरे साथ चैनल के लिंक को क्लिक करें और चैनल को लाइक, सब्सक्राइब, शेयर जरूर करें।।
स्त्री विमर्श स्त्री चिंतन अखिल भारतीय साहित्य परिषद |
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