विषय:- गणपति यंत्र और श्रीयंत्र पर चर्चा
सीरीज़:- #NOFILTER LIVE
अतिथि:- आचार्य श्री जितेन्द्रे जी
स्थान:- वाराणसी उत्तर प्रदेश से
शीर्षक:- नमस्कार भारत मेरे साथ चैनल के #NOFILTER Live सीरीज़ में आप सभी दर्शकों का स्वागत है। आज #NOFILTER Live सीरीज़ में अतिथि वाराणसी उत्तर प्रदेश से आचार्य श्री जितेन्द्रे जी से चर्चा की जाएगी। इस चर्चा में भारत मेरे साथ चैनल की संचालिका सुश्री सुरभि सप्रू जी आचार्य श्री जितेन्द्रे जी से श्री महा गणपति यंत्र और श्री यंत्र पर विशेष बातचीत करेंगी। और ये चर्चा एक अहम् विषय या आयोजन को लेकर हो रही है। वाराणसी उत्तरप्रदेश में श्री गणपति यंत्र और श्री यंत्र का गंगा घाट पर तीन दिवसी आयोजन होने जा रहा है। दिनाँक 2-3-4 दिसम्बर २०२५ को।
जिसमे पूरे देश भर से आचार्य, महंत, साधु- संत इत्यादि लोग सम्मलित हो रहे हैं और इस आयोजन में सभी को श्री गणपति यंत्र और श्री यंत्र दिए जायेंगे। और तीन दिन तक रहने और खाने की पूरी व्यवस्था भी है। जो कोई भी इसमें भाग लेना चाह रहा हो तो भारत मेरे साथ चैनल में सन्देश भेज कर पूरी जानकारी को प्राप्त करें।

प्रश्न:- किसी को भी कोई भी यंत्र घर पर रखना है तो उसकी विद्या क्या है ? कैसे और कौन सा यंत्र लेना चाहिए ?
उत्तर:- जो यंत्र स्वयं के द्वारा निर्मित होता है वो यंत्र परिपूर्ण होता है और जब उसका निर्माण होता है तो उसमे जो है जिस देवता का यंत्र है उस देवता के प्रारूप को ही उसमे निर्धारित किया जाता है वो स्वयं देवता उस यंत्र में विधमान होता है। और जब हम लोग चर्चा कर रहे हैं श्री महागणपति यंत्र और श्री यंत्र की तो श्री यंत्र तो सबसे विशिष्ट यंत्र में श्री चक्रराज कहा गया है। और श्री चक्र राज का सबसे बड़ा मतलब यह है कि अब उससे ऊपर कोई यंत्र नहीं है। इस यंत्र में सभी यंत्र समाहित हैं। सरे देवताओं का आवरण उसमे विधमान है और महागणपति उनके सबसे प्रिय अंग हैं। तो इसके लिए श्री यंत्र के साथ महागणपति यंत्र कि अवश्य पूजन करना चाहिए। और इसका प्रारूप यह है कि आजकल जो बाजार में श्री यंत्र और महागणपति यंत्र या फिर जो भी यंत्र मिल रहे हैं। उनको पूरी तरह से परिमाणित नहीं किया जा सकता है। इसीलिए उसमे जो विद्या होनी चाहिए उस विद्या से लोग परे बनाते हैं। ये बाजार के यंत्र पूजन योग्य नहीं होते हैं। और साधना के लिए जो विधायँ है वो सब अलग हैं। क्योंकि यंत्र स्वयं देवी होती है।
श्री श्री चक्रराज निलया श्रीमत त्रिपुर सुंदरी “
ऐसा ललिता सहस्त्रनाम में कहा गया है। और सबसे बड़ी बात यह है कि हम सभी को यंत्र से क्या मिलता है ?……”:देवो भूत्वा देवं यजेत्’”
सामने जो यंत्र है उस यंत्र को अपने शरीर के अनुसार ही यंत्र में समाहित करके उसका अर्चन करते हैं उस यंत्र का
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प्रश्न:- बिना गुरु के कोई भी यंत्र धारण करना चाहिए या नहीं ?
उत्तर:- यदि किसी के पास बिना गुरु दीक्षा के श्री यंत्र धारण किये है तो उस यंत्र को गंगा जी ने विसर्जित कर सकते हैं। क्योंकि बाजार से लेकर कोई यंत्र ऐसे नहीं धारण करना चाहिए। ये बातें होती हैं कि हमको श्री यंत्र रखें की विद्या नहीं पता होती है और हम लोग बिना जानकारी के बाजार से लेकर आ जाते हैं। इस प्रकार की जो गलती करते हैं। इसमें हमको दोष भी लगता है अगर देवता के पृष्ठ भाग को अपने तरफ करके हम रखें और उसकी पूजन करेंतो इसका विशिष्ठ फल प्राप्त नहीं होता है। वो दोष पूर्ण हो गया है। और यदि देवता के सम्मुख बैठकर पूजन करते हैं तो इसका फल जरूर प्राप्त होता है।
और यदि हम घर पर किसी यंत्र को रखते हैं तो सबसे पहले हमे ये पता होना चाहिए कि यंत्र को कैसे स्थापित ,विद्या क्या, दिशा कौन सी होनी चाहिए ये सभी बातों से अवगत होकर ही यंत्र आदि की पूजा करनी चाहिए।

अन्यथा वो दोष पूर्ण मन गया है और वो दोष युक्त मन जाये गा। यदि हमको ऐश्वर्य चाहिए तो हमको देवता को प्रसन्न करने हेतु देवता के सूक्ष्म शरीर को अपने सम्मुख बैठकर ही उसका पूजन करना चाहिए क्योंकि यंत्र जो है वो सूक्ष्म तल है। स्थूल नहीं है। और यंत्र स्वयं देवता है। जब तक उस यंत्र का प्राणप्रतिष्ठा न कराया जाए तो वो यंत्र केवल एक धातु है और प्राण प्रतिष्ठा की विद्या तभी होती है जब कि उसे दीक्षित व्यक्ति उसको जानकर उसको प्रतिष्ठापित करें।
और श्री यंत्र को बाजार से लेकर ऐसे ही नहीं रखना चाहिए उसे बड़े सम्मान के साथ रखना चाहिए क्योंकि वो एक स्त्री स्वरुप है।
नोट:- भारत मेरे साथ चैनल की सुश्री सुरभि सप्रू जी और आचार्य जितेन्द्रे जी वाराणसी उत्तर प्रदेश से गणपति यंत्र और श्रीयंत्र पर पूरी चर्चा के लिए नीचे दिए गए चैनल लिंक को क्लिक करें और पूरा सही क्या है एपिसोड को देखें।।




