विषय:- सनातन के विस्तार के लिए जातियों से ऊपर उठना आवश्यक !
सीरीज:- सही क्या है ?
अतिथि:- महंत श्री जयराम दास जी
स्थान:- श्री राम आश्रम अयोध्या उत्तर प्रदेश
शीर्षक:- नमस्कार भारत मेरे साथ चैनल के सभी दर्शकों का सही क्या है ? सीरीज़ में स्वागत है। इस सीरीज़ में अयोध्या से महंत जयराम दास जी से सनातन, संस्कृति, धर्म,संस्कार, इतय्दी को लेकर बात करेंगी भारत मेरे साथ चैनल की संचालिका सुश्री सुरभि सप्रू जी।
सुरभि सप्रू जी इस सीरीज़ और विशेष व्यक्तव में बताती हैं कि सनातन धर्म एक बहुत ही विशाल विचार वाला धर्म है साथ हे साथ इसमें व्यवहार आचार विचार इन तीनों का जब मिश्रण देखते हैं। तब बहुत ही वूस्टर से हे धर्म को समझने के लिए भारत मेरे साथ की पूरी टीम अलग अलग स्थानों पर तीर्थ स्थलों पर साधु संत महंतों के साथ बैठकर एक अच्छी सार्थक चर्चा करते हैं। जो सत्य होती है जिससे हम सभी भी इस धर्म के प्रति जागरूक हो सके और साथ ही आप सभी को भी सत्य बता और दिखा सकें। चैनल के माध्यम से। तो सनातन से जुडी कई सारी और चर्चा करने के लिए अयोध्या श्री राम जन्म भूमि में श्री राम आश्रम अयोध्या उत्तर प्रदेश में हूँ।
जीवन परिचय:- इस सीरीज़ के जो विशेष अतिथि महंत श्री जयराम दास जी हैं। ये श्री राम आश्रम और गुरुकुल के महंत हैं। इनका जन्म बिहार के सीतामणी में हुआ। इसके बाद इन्होने अपनी शिक्षा ग्रहण करें के लिए आयोध्या आये फिर कुछ समय मथुरा वृन्दावन कशी में शिक्षा ग्रहण किया। फिर से लौट कर ये अपने प्रथम गुरु के पास अयोध्या वापस आगये। और अपना पूरा जीवन भगवान श्री राम और माता सीता के चरणों में अर्पण कर दिया है।
महंत श्री जयराम दास जी आज बात करेंगे सविंधान, संस्कृति, समाज, और संस्कार जैसे इतय्दी विषयो पर!

प्रश्न:- मनुस्मृति और डॉ बी आर आंबेडकर की वर्ण व्यवस्था में क्या अंतर है ?
उत्तर:- समस्त सनातन धर्म को मैंने वाले अनुयायी वो किसी भी वर्ण व्यवस्था के लोग हैं उन्हें मैं आग्रह पूर्वक कहना चाहूंगा कि जो हमारा सविंधान लिखा गया है डॉ बी आर आंबेडकर जी के द्वारा भारतीय कानून व्यवस्था भारतियों को रहने की व्यवस्था हर विषय को लेकर लिखा गया है। ये निश्चित रूप से कल्याणकारी है। कोई अकालयंकारी नहीं है। परन्तु उसमे ऐसी भी बातें लिखी गयी हैं जो हमारे हिन्दू समाज को जाती मत मज़हब धर्म में बाँट दिया गया है । मैं महंत जयराम दास आपको बता देता हूँ कि रामायण गीता भागवत उपनिषद मनुस्मृति ये अनुकरणीय है। इनका अनुकरण करके चलेंगे तो कभी आपको कष्ट नहीं हो सकता है जीवन में। और अगर किसी को कष्ट हुआ है तो बताये कि हमको रामायण गीता उपनिषद पढ़कर या ईश्वर की भक्ति करके कष्ट हुआ है। परन्तु सविधान को मन कर जरूर कष्ट हुआ है। इसीलिए कष्ट होगा कि सविधान को मैंने वाले उन सभी लोगो से मैं कहना चाहता हूँ भारत मेरे साथ चैनल के माध्यम से कि भारत देश को आज़ाद हुए 80 वर्ष हो गए हैं। और ८० वर्ष के बाद भी दलित दलित ही रह गया क्यों ? इतना आरक्षण मिलने के बाद भी !
क्योंकि बाबा साहब डॉ बी आर आंबेडकर जी ने काह था कि १० वर्ष के बाद आरक्षण को रूक दिया जाये गा लेकिन आरक्षण ख़त्म करने कि वजह अब तो दलित को तीन भागों में बाँट दिया गया है। दलित, महादलित, अतिदलित !
सविंधान ने केवल बाँटने का काम किया है समाज को। आज भी इस देश में कहीं भी किसी किसी भी शास्त्र या वेद पुराणों उपनिषदों में लिखा हो तो आप हमको बता दीजिए कि ये व्यक्ति जो है वो रामायण गीता वेद पुराणों उपनिषदों का ज्ञान नहीं कर सकता है।
यदि ऐसा लिखा होता तो संत रविदास जी शिरोमणि रविदास जी बने होते क्योंकि वो तो हरिजन मतलन दलित समाज से थे लेकिन इनको संत शिरोमणि बनाने वाला शाश्त्र था सविंधान नहीं। शास्त्रों को पढ़कर आप धर्मात्मा बन सकते हो लेकिन सविंधान को मानने वाले कभी भी सविधात्मा नहीं हुए आज तक।

रामायण गीता उपनिषद पढ़कर जरूर कोई रविदास सूरदास धन्ना जाट पीपा नरेश इत्यादि संत शिरोमणि बन जाओगे ……………..।
किसी भी शास्त्र या वेद पुराणों उपनिषदों में लिखा हो तो आप हमको बता दीजिए कि ये व्यक्ति जो है वो रामायण गीता वेद पुराणों उपनिषदों का ज्ञान नहीं कर सकता है।
यदि ऐसा लिखा होता तो संत रविदास जी शिरोमणि रविदास जी बने होते क्योंकि वो तो हरिजन मतलन दलित समाज से थे लेकिन इनको संत शिरोमणि बनाने वाला शाश्त्र था सविंधान नहीं। शास्त्रों को पढ़कर आप धर्मात्मा बन सकते हो लेकिन सविंधान को मानने वाले कभी भी सविधात्मा नहीं हुए आज तक।
रामायण गीता उपनिषद पढ़कर जरूर कोई रविदास सूरदास धन्ना जाट पीपा नरेश इत्यादि संत शिरोमणि बन जाओगे ……………..।
प्रश्न:- सनातन धर्म में सगुन निर्गुण नास्तिक और तामसिक प्रवृति क्या है ?
उत्तर:- मैं बार बार लोगों से यही कहता हूँ कि आज १५ साल के मुसलमान के घर या इस्लाम को मानने वाले जितने भी मुसलमान हैं वो सभी कुरान का अध्ययन करते हैं उस कुरान में कहीं ऐसे भी शब्द लिखे हैं जो समाज का अहित कर रहा है मानवता का विनाशक है इन शब्दों को भी वो लोग मान रहे हैं। परन्तु हमारे सनातन धर्म में शास्त्रों में वेदों पुराणों में कहीं समाज राष्ट्र मानवता का हितकर नहीं है।
सब जगह पक्षधर हैं और हमारे हिन्दू समाज वो किसी भी वर्ण के हों उन्हें मैं आग्रह करूंगा की पहले शास्त्रों का अध्ययन करे।
मनुस्मृति को गली देने वाले जितने भी लोग हैं वो लोग एक बार मनुस्मृति को पढ़िएगा। हमारे यहाँ क्या है कि सगुन और निर्गुण ये दो प्रकार के उपासक हैं निर्गुण ब्रम्ह जो है जिसको नाम जाप या नाम उपासक कहते हैं जैसे कबीर दास इत्यादि
इसी कड़ी में ऐसे ही जो निर्गुण निरंकार ब्रह्म है साधना आराधना उसके बाद वो सगुन उपासक हो जाते हैं। जो सगुन था एक मेटिका था वो सब का व्यापक रूप हो गया।
“सिय राम मय सब जग जानी।
करहु प्रणाम जोरी जुग पानी ।।
और अपने यहाँ रजोगुण, सतोगुण और तमोगुण ये तीन प्रकार के हमारे शरीर में रक्त संचालित होते रहते हैं जब हमारे शरीर में रजोगुण आएगा तो राजशाही बातें विचार और सद भावनायें उठने लगती हैं। जब सतोगुण आएगा तो मन में चिंतन तो होगा आराधना साधना जीवन भाव भक्ति परिवार कुटुंब बसुधा ये सब आने लगेगी। और जब तमोगुण आएगा तो तमोगुण आपको सिर्फ अपने उत्थान के लिए सोचेगा और उसके साथ दूसरे के पतन……………………।
नोट :- भारत मेरे साथ चैनल की सुश्री सुरभि सप्रू जी और महंत श्री जयरामदास जी के द्वारा सनातन सविंधान संस्कृति पर विशेष बातचीत को सुनने के लिए नीचे दिए गए चैनल लिंक को क्लिक करें और पूरा सही क्या है एपिसोड को देखें।।




