विषय:- सितार और इसके घराने
सीरीज़:- म्यूजिक टेल्स (Music Tales)
अतिथि:- श्री उमाशंकर जी
शीर्षक:- नमस्कार भारत मेरे साथ चैनल के म्यूजिक टेल्स सीरीज़ में आप सभी दर्शकों का स्वागत है। आज इस सीरीज़ में सुश्री सुरभि सप्रू जी सितारवादक श्री उमा शंकर जी से सितार और उनकी परम्परा को लेकर विशेष बातचीत करेंगी। क्योंकि वाद्य यंत्र संगीत को एक सुर को माला में पिरोने का काम करती है। वाद्य यंत्र को हमारे देश में भगवान और गुरु का दर्जा दिया गया है।
प्रश्न:- सितार वादक श्री उमा शंकर जी का घराना, परम्परा और गुरु कौन हैं ?
उत्तर:- सितार वादक श्री उमाशंकर कहते हैं कि सितार को मैंने नहीं सितार ने मुझे चुना है क्योंकि आपको पता नहीं होता है कि आपकी किस्मत आपको किस मोड़ पर लेजाए गी। आपको बताएं कि बचपन में मुझे ये तक नहीं पता था कि ये कौन सा वाद्ययंत्र है और किस तरह से ये बजाया जाता है। ये तो ईश्वर की बहुत बड़ी कृपया है कि मुझे सितार ने इस लायक समझा और मुझे चुना कि मैं संगीत, सितार, मातापिता, और अपने गुरुजनो का आशीर्वाद प्राप्त करते हुए इस वाद्य यंत्र सितार को हमेशा के लिए अपने जीवन में लेकर आऊं।
इसी के साथ मेरी जो शिक्षा हुयी तो प्रारम्भिक शिक्षा पटना बिहार में हुयी। मेरे जो गुरु थे वो बिहार के बहुत हीव बड़े सितार वादक श्री आशीष चटर्जी जी के शागिर्द में होकर हुयी। इसके बाद में शिक्षा ग्रहण करने के लिए दिल्ली आया और बड़े सौभाग्य कि बात है कि यहाँ परमैं गुरु पदम् भूषण श्री पंडित बेबू चौधरी जी के द्वारा हुयी है उन्होंने मुझे अपना शिष्य के रूप में अपनाया। और एक तालीम मुझे दी कि किस तरह से परम्परा का अनुसरण करना है। हमे किस तरीके से अपनी परम्परा को करना चाहिए।
एक बात यह है कि परम्परा की जो खास बात होती है वो हमारे गुरु पंडित बेबू चौधरी जी जयपुर के सेनिया घराने से थे। और मैं भी उन्ही के बताये हुए रास्ते में चल रहा हूँ। और उनकी परम्परा को आगे बढ़ा रहा हूँ। क्योंकि मैं भी सेनिया घराने का विद्यार्थी हूँ। इस घराने की खास बात ये है कि सभी घरानो में 19 पर्दे का सितार होता है लेकिन सेनिया घराने में 17 पर्दे का ही सितार होता है।
…………..।



“सितार लकड़ी, तून की लकड़ी, धातु, तूमड़ी और चिकरी से बना एक तार वाद्य यंत्र है। पूरे उत्तर भारत में शास्त्रीय संगीत समारोहों में एकल वाद्य यंत्र के रूप में मुख्यत: उपयोग किया जाता है।”और सितार यंत्र को किस तरह से बनाया जाता है सितार की धुन को और उनकी पूरी परम्परा को देखने और सुनने के लिए……………।
भारत मेरे साथ की संचालिका सुश्री सुरभि सप्रू और सितार वादक श्री उमा शंकर को सितार वादक की विशेष चर्चा के द्वारा इसकी परम्परा और उसकी धुन गीतों को सुनने और देखने के लिए नीचे दिए गए भारत मेरे साथ चैनल के लिंक को क्लिक करे और चैनल को लाइक सब्सक्राइब शेयर जरूर करें
Note: – शो पर बोली गयी कोई भी बात चैनल के द्वारा लिखित नहीं है जो भी अतिथि या प्रवक्ता बात कर रहे हैं वो उनके खुद की विचारधारा हैं भारत मेरे साथ चैंनल उसके लिए जिम्मेदार नहीं है।




