Monday, January 26, 2026
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सनातन धर्म में जो सती प्रथा है वह धर्म का हिस्सा है या नही और इसको प्रथा माने या ये प्रथा है क्या ?

हमारी पीढ़ी तो सती प्रथा जो ये नितांत झूठ है बहुत बड़ा झूठ है फ्रॉड भारतवर्ष में पूरे बृहत्त भारतवर्ष में सती प्रथा नाम की कोई प्रथा किसी भी समय नहीं रही हम क्योंकि इसे व्यवहार से मैं बता रहा हूं बता दे रहा हूं जिस राममोहन राय को राजा राममोहन राय बताकर कहा जाता है कि इन्होंने सती प्रथा का विरोध किया 1830 में एक कानून अंग्रेज ले आए और उसमें सती प्रथा बैन एक्ट बनाया गया |

राममोहन राय जिस कुल खानदान से आते थे हम उनके अपने कुल खानदान में एक यह प्रथा थी। पूरे बंगाल में कहीं नहीं थी। पूरे भारत में कहीं नहीं थी। उनके खानदान उनके खानदान में कुछ समय से यह प्रथा थी। कुछ समय से बहुत कुछ समय से। और राममोहन रायकि अंग्रेजों के बड़े निकट थे। कोई यही हमको बताएं ना कि वो कहां के राजा थे। भाई किस स्टेट के राजा थे? उनको राजा की भी उपाधि दी गई। उनको उनके अपील पर एक एक्ट भी बना दिया गया तत्काल और कहा गया कि भारत से सती प्रथा का उन्मूलन भारत का सती प्रथा से कोई लेना देना नहीं हमारे यहां सिर्फ राणा वंश में रहा है |

औरतें औरतों ने जब देखा कि उनके ऊपर मुगल आक्रमण हो गया तो उन्होंने अपना जौहर कर लिया और वो हजारोंज़ की संख्या में एक बार कर ली खत्म कर दी ऐसा भी नहीं कि रोज-रोज हो रहा है सती प्रथा प्रथा को एक प्रथा के रूप में विकृत तरीके से हमारे इतिहास में घुसे दिया। ऐसी कोई प्रथा भारत में कभी नहीं रही है। इसका जो प्रमाण मुझसे कोई मांगेगा वो मैं दे दूंगा। वो सिर्फ राममोहन राय के अपने व्यक्तिगत परिवार में एक प्रथा थी। उस प्रथा का उन्होंने विरोध किया। हम उसके लिए उन्होंने अंग्रेजों से मदद मांगी और उस समय की अंग्रेज सरकार ने संविधान एक जो भी कानून चलता होगा उस कानून में एक संशोधन किया एक्ट में और संशोधन करके उसको खत्म करा दिया बैन करा दिया वो उनके परिवार का निजी मामला और ये बाहर भारत से इसका कोई लेना देना नहीं कहीं है ही नहीं तो हम सती किसको माने यहां पर सती हमारे यहां शक्ति है भाई सती हमारा शिव की पत्नी है। सती सृष्टि की संचालिका है। वो जगत जननी है। भाई ऐसे कोई महिला जाके कहीं जल के मर जाएगी उसको हम सती कह देंगे। सती शब्द का अर्थ भी मालूम है इन मूर्खों को। सती शब्द सीधासीधा शक्ति का प्रतीक है। और हमारी स्त्रियों को इस तरह से आप बताएंगे। हमारे यहां स्त्री से इत कुछ है ही नहीं अस्तित्व में। हमारे यहां सृष्टि स्त्रीलिंग है। प्रकृति स्त्रीलिंग है। संस्कृति स्त्रीलिंग है। पूजा स्त्रीलिंग है। आराधना स्त्रीलिंग है। आरती स्त्रीलिंग है। अर्चना आचमन सब कुछ स्त्रीलिंग है। हमारे हमारी नदियां सारी स्त्री है। भाई स्त्री तत्व सनातन ने यह माना है कि स्त्री तत्व के अधीन ये सृष्टि है। यह जगत है। जो कुछ भी अस्तित्व है यह स्त्री के अधीन है। इसीलिए हमारे यहां पूरे जगत की नियंता भाई भगवान राम भी किसकी पूजा करते हैं? रावण को मारने से पहले शक्ति की पूजा करते हैं। शक्ति की पूजा करते हैं। तो शक्ति से ही तरह हमारे यहां क्या है? आप क्रम देखिए ना अपने उत्सवों का। हम उत्सव तो शुरू हो रहे हैं। पितृ पक्ष चल रहा है। इसके बाद क्या आएगा? नवरात्रि। नवरात्रि आएगा। और इससे पहले क्या बीता सावन में? शिव की पूजा आपने सावन भर की। उसके बाद पितरों की पूजा कर रही है। पितरों की पूजा के बाद सीधे आपको शक्ति की पूजा में जाना है। ये हमारी परंपरा है।

Note: – शो पर बोली गयी कोई भी बात चैनल के द्वारा लिखित नहीं है जो भी अतिथि या प्रवक्ता बात कर रहे हैं वो उनके खुद की विचारधारा हैं भारत मेरे साथ चैंनल उसके लिए जिम्मेदार नहीं है।

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