Monday, January 26, 2026
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सत्य सनातन धर्म का सही परिचय !

विषय:- सत्य सनातन धर्म का सही परिचय !
सीरीज़:- सही क्या है ?
अतिथि:- आचार्य संजय तिवारी
शीर्षक:- सत्य सनातन धर्म के ग्रन्थ, इतिहास, संस्कृति, सनातन के साथ छल, भाषा, बोली गीता इत्यादि का सही परिचय क्या है?
नमस्कार, भारत मेरे साथ चैनल की सीरीज़ सही किया है? मैं आप सभी दर्शकों का हार्दिक स्वागत है।आज भारत मेरे साथ चैनल से संचालिका श्रीमती सुरभि सप्रू जी सही क्या है की सीरीज में सत्य सनातन धर्म के विषय में बात करेंगी। आचार्य संजय तिवारी जी से जो लखनऊ उत्तर प्रदेश से है। ये सनातन साहित्य संस्कृति इत्यादि विषय पर तात्पर्य काम कर रहे हैं और इनकी एक पत्रिका भी संस्कृति नाम की आती है, जिसमें ये भारत की संस्कृति धरोहर को भी वो लगातार डॉक्यूमेंट कर रहे हैं।
सनातन धर्म में हिंदुत्व कहना कितना सही है और ये शब्द कहाँ से आया है?
ये सभी को समझना चाहिए कि हमारे यहाँ धर्म शब्द वेद से आया है और हिंदू शब्द बहुत ही बाद की उत्पत्ति है। धर्म शब्द जब वेद में आता है तो उसकी अपनी व्याख्या है, उसकी अपनी पहचान है।धर्म जो वेद कहता हैं वेद के ऋषि जीस धर्म की बात करते हैं, वो धर्म ना कोई पंत, ना कोई मजहब, ना कोई सम्प्रदाय, ना किसी खास व्यक्ति के लिए होता है।वेद का कोई वाक्य?श्लोक आदेश मंत्र वचन केवल किसी एक समुदाय विशेष के लिए नहीं होता है।वेद जो भी आदेशित करता है, वो समस्त मान्यता के लिए करता है। समस्त सृष्टि पृथ्वी और प्रकृति के लिए करता है तो वे कहीं से भेदभाव किसी के साथ नहीं करता है।तो वेद के ये वचन क्योंकि ये सभी के लिए समान रूप से है इसलिए ये शाश्वत है और इसकी शाश्वतता की जड़ वही है जिसे हम सनातन कहते हैं तो सनातन है तो शाश्वत है, वह है, था और आगे रहेगा भी।

रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि कौन थे?
रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि अपना परिचय स्वयं रामायण में देते हैं कि मैं कौन हूँ?वो अपने को बताते है की “अहमः प्रचेतस” यानी ब्रह्मा के मानस पुत्र प्रचेता के दसवें पुत्र महर्षि वाल्मीकि मैं खुद हूँ और ये परिचय किसी और से नहीं, भगवान श्री राम से स्वयं देते हैं। लेकिन हमारे इतिहास हमारे ग्रंथों के साथ इतना छेड़छाड़ किया गया कि उनको एक समाज में बदल दिया गया है। वाल्मीकि समाज मतलब की इतना बड़े रचयिता महर्षि वाल्मीकि । जिन्होंने रामायण लिख और राम से वार्तालाप कर रहे हैं उनको उनको चोर बताया गया है कि वो चोर थे, उंगुलीमार थे वो उंगुली काटते थे फिर उनको किसी ने दर्शन दिया और वो उनको भगवान की प्राप्ति हुई और वो फिर रामायण लिखने लग गए।कितना छोड़छाड़ हमारे ग्रंथों के साथ हमारे संस्कृति के साथ हमारे समाज के साथ किया गया है।

इस विषय को सत्य सनातन को समझने और जानने के लिए भारत मेरे साथ सुरभि सप्रू और आचार्य संजय तिवारी के पूरे एपिसोड को देखने के लिए भारत मेरे साथ चैनल के नीचे दिए गए लिंक को क्लिक करें और पूरा समझे और जानें।

Note: – शो पर बोली गयी कोई भी बात चैनल के द्वारा लिखित नहीं है जो भी अतिथि या प्रवक्ता बात कर रहे हैं वो उनके खुद की विचारधारा हैं भारत मेरे साथ चैंनल उसके लिए जिम्मेदार नहीं है।

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