Monday, January 26, 2026
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लुप्त हो रहे मृदंगम वाद्ययंत्र को कैसे संजोए रखा डॉ राममूर्ति केशवन ने

विषय= मृदंगम वाद्ययंत्र
सीरीज़= म्यूजिक टेल्स
अतिथि= वाद्य रत्न तंजौर डॉ रामामूर्ति केशवन

शीर्षक:- नमस्कार भारत मेरे साथ चैनल की म्यूजिक टेल्स सीरीज़ में आप सभी प्रिय दर्शकों का स्वागत है। आज इस सीरीज़ में हमारे साथ हैं वाद्य रत्न तंजौर डॉ रामामूर्ति केशवन जी जो कर्नाटक तंजौर के रहने वाले हैं वर्तमान समय में दिल्ली में रहते हैं। डॉ रामामूर्ति केशवन तंजौर कर्नाटक से हैं इस स्थान की एक महानता ये है कि जैसे हिंदुस्तान संगीत का मुख्य घराना बनारस होता है वैसे ही कर्नाटक संगीत का मुख्य घराना या कह सकते हैं कि कर्नाटक संगीत की उत्पत्ति तंजौर से हुयी है। और जो भरतनाट्यम नृत्य कर रहे हैं इसका भी मुख्य केंद्र बिंदु तंजौर ही है। वाद्य रत्न तंजौर डॉ रामामूर्ति केशवन जी अपने परिवार के 7वीं पीढ़ी है इनके पिता हरिकथा कहते थे इनके दादा जी मृदंगम बजाते थे इसी तरह से इनके परिवार में सभी लोग संगीत से जुड़े हुए हैं। वाद्य रत्न तंजौर डॉ रामामूर्ति केशवन तंजौर से दिल्ली सन 1993 में आये हुए थे दिल्ली में इनकी सर्वप्रथम गुरु पद्म भूषण यामिनी कृष्णमूर्ति के समक्ष मृदंगम की शिक्षा ग्रहण किया था इसके बाद इन्होने पद्मभूषण सरोज वैद्यनाथन और पद्मभूषण स्वपन सुंदरी के साथ शिक्षा ग्रहण करने के साथ साथ काम भी किया है। और वाद्य रत्न तंजौर डॉ रामामूर्ति केशवन जी मृदंगम के साथ नटवांगम भी करते हैं।



कर्नाटक में संगीत के चार वाद्य यंत्र होते हैं। जिसमे से मुख्य मृदंगम इसके साथ घटम, ख़ंजरा, और मोरसिंह होता है।
वाद्य रत्न तंजौर डॉ रामामूर्ति केशवन जी इस सीरीज़ में गणेश वंदना से शुरुआत करेंगे।
गणेश वंदना की पंक्ति = ” हरी तिरु मरू घन विघ्न विनायक।
विनायकड़ अरु गणपति जय जय।।

इसके बाद भारत मेरे साथ की संचालिका सुश्री सुरभि सप्रू जी और डॉ रामामूर्ति केशवन जी की कर्नाटक संगीत को लेकर विशेष बात चीत होगी। जिसमे डॉ रामामूर्ति केशवन जी के घराने वहां का संगीत और कर्नाटक के लोकगीत पर बात करेंगी।

नोट:= डॉ रामामूर्ति केशवन जी और सुरभि सप्रू के द्वारा भारत मेरे साथ चैनल के म्यूजिक टेल्स सीरीज़ के माध्यम से पूरा एपिसोड देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक को क्लिक करें और भारत मेरे साथ चैनल को लाइक सब्सक्राइब शेयर और कमैंट्स जरूर करें।

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