Sunday, March 15, 2026
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ब्रज का महत्त्वपूर्ण धाम कौन सा है? जो भगवन श्री कृष्ण को प्रिय था ?

ब्रज का महत्त्वपूर्ण धाम कौन सा है? जो भगवन श्री कृष्ण को प्रिय था ?
ब्रज संस्कृति शोध संस्थान श्री धाम गोदा विहार मंदिर वृन्दावन से सचिव श्री लक्ष्मीनारायण तिवारी ने बताया कि वृंदावन जो है ना ये ब्रज का हृदय स्थल है। ब्रज जो है बहुत बड़ा क्षेत्र है। और यह कहा भी जाता है कि ब्रज का जो पूरा कमल है उसका जो मकरंद है वो वृंदावन धाम है। भगवान का जो सबसे प्रिय स्थान ब्रज में वृंदावन को माना गया है। और वृंदावन की जो स्थिति है वो मध्य क्षेत्र में स्थापित है।

मथुरा भारत का प्राचीनतम सप्त मोक्षदायनी जो पुरिया है भारत की उनमें से एक पूरी है मथुरा ।
परंतु वृंदावन जो है वो नगर नहीं है। वृंदावन भगवान का घर है और इसलिए ही वृंदावन को तीर्थ नहीं कहते। हम लोग वृंदावन को धाम कहते हैं। ठाकुर जी का हमारे कृष्ण चंद्र और राधा रानी का जो निज धाम है वह वृंदावन है।

और वृन्दावन में भक्ति के लिए यहां पर मीरा भी आई। यहां चैतन्य महाप्रभु भी आए। यहां कितने ही साधक और भक्त आचार्य अनादि काल से इस भूमि के दर्शन के लिए आते रहे हैं और कितने ही ऐसे भक्त साधक आए हैं जो यहां आए और हमेशा के लिए किसी भूमि में खोकर के रह गए और उससे मुक्त नहीं हो सके और लौट के भी नहीं गए। वृंदावन से जो आया और हम लोग कहते ही हैं |

यह कहावत भी है कि आप वृंदावन जा तो सकते हैं पर वृंदावन से लौट के तो फिर शरीर आता है। मन तो वृंदावन में ही मनुष्य का रम जाता है। वृंदावन से कोई लौट के नहीं जाता। हम शरीर है वह लौट के चला जाता है और वृंदावन में तो वास्तविकता तो यही है पर दुर्भाग्य यह है कि 21वीं सदी में जो वृंदावन हमने अपने बचपन में देखा था क्योंकि 20वीं सदी का जो अंतिम भाग है वो हमने देखा था और जो हमारे सारे बचपन का वृंदावन था और ब्रज मंडल जो था वो बहुत दिव्य था और प्राकृतिक वातावरण से पूरी तरह से युक्त था। अभी का जो वृंदावन है वो तो हमारे देखते देखते ही कंक्रीट के वन में तब्दील हो गया है। और वो वृंदावन जो हमने अपने बचपन में देखा वो वृंदावन अब यह वो वृंदावन रहा ही नहीं है। साधकों के लिए एक ऐसी जगह हुआ करती थी जहां व्यक्ति खुद अपने आप से आकर के मिलता था। संसार को छोड़कर के अब आकर के जो व्यक्ति कुछ दिन यहां रहता था तो ऐसा तीर्थ का ऐसा पूर्ण भाव उसका अंदर उदय होता था। उस एकांत में वो कुछ अपने आप से भी मिलता था। और आज की वृन्दावन की स्थिति यह हो गई है कि वृंदावन पर्यटन का केंद्र बन गया है। भक्ति का जो गहरा भाव है वो द्रोहित हो गया है। ये बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है।

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