योग का जो दर्शन है पतंजलि ऋषि पतंजलि से ही आता है। तो योग के जो सूत्र हैं उसके बारे में आप क्या कहते हैं ?
पतंजलि योग सूत्र योग की आधारशिला है। 195 सूत्राज जो है उन्होंने दिए हैं पतंजलि महर्षि ने और ऐसा कहते हैं कि पतंजलि ऋषि जो हैं वैसे तो यह ज्ञान जो है। जब पतंजलि का जन्म हुआ तो ऐसा कहते हैं वह शेषनाग अवतार है। ठीक है? अभी शेषनाग अवतार है तो धरती पर उनका अवतार हुआ। उन्होंने योग का प्रवर्तन किया क्योंकि उसके पहले आदि शिव जो थे वही योग के प्रवर्तक माने जाते थे। फिर उस योग का अलग-अलग ग्रंथों में अलग-अलग तरीके से फैला हुआ था। पतंजलि ऋषि ने कहा कि नहीं योग जो है अपने आप में एक बहुत उन्नत चीज है। इसलिए इसे एकजुट होना चाहिए। तो सभी ग्रंथों में से जहां-जहां योग विस्तृत है उन सभी को एकजुट करके उस ज्ञान को वो किसी को देना चाहते थे। तो पहले हमारी संस्कृति ऐसी है कि लिखित में कुछ नहीं होता था। जो कुछ भी है मौखिक है। हमने वेद को भी कई वर्षों तक मौखिक ही रखा। आगे से आगे अपनी पीढ़ी को देते गए देते गए देते गए। उपनिषद हो गए आप वेदांत हो गए या किसी भी ब्राह्मण हो गए कुछ भी हो गया। हम उन सभी को मौखिक देते गए। अब यही क्या हुआ? पतंजलि ऋषि ने पूरे भारतवर्ष में एक बात कही कि मुझे 100 ऐसे व्यक्ति चाहिए जो उस ज्ञान को अनुभव कर सके। तो 100 ऐसे विद्वान भारत के महान विद्वान एकत्रित हुए और पतंजलि ऋषि ने अपने आगे एक पर्दा रखा और एक ही चीज कही कि बस इस पर्दे को उठाकर मत देखना कि इसके पीछे क्या हो रहा है। तुम बस अपने उस ज्ञान को अनुभव करते रहना। तो ऋषियों ने सब ने हां कर दी। अब जैसे ही पतंजलि ऋषि अपने ज्ञान का प्रवाह शुरू करने लगे तो प्रकाश स्वरूप उस वातावरण में योग का ज्ञान फैलने लगा और वह सभी विद्वान जो ध्यान की अवस्था में बैठे थे उनके अंदर वो स्वत ही योग का ज्ञान उतरने लगा। अब वो योग का ज्ञान उतर रहा था तो किसी विद्वान को लघु शंका हुई। हम तो वह उठा और उठ के बाहर लघु शंका करने गए। जैसे ही वह बाहर निकले तो पास वाले के पास भी वाइबेशंस तो पहुंचते ही हैं। जैसे ही एक विद्वान उठ के गए पास वाले को लगा कि अरे कुछ तो हुआ है। फिर उनके मन में एक जिज्ञासा जागी कि ऐसा क्या है? इतना प्रकाश हो रहा है इस पर्दे के पीछे। तो मैं एक बार इस पर्दे को उठाकर देखता हूं। और उन्होंने जैसे ही उस पर्दे को उठाया और सभी के सभी विद्वान जो 99 विद्वान थे वह सब भस्म हो गए। अब वह सब भस्म हुए तो जो एक बाहर गए थे वो वापस अंदर आए। पतंजलि ऋषि सब समझ गए क्योंकि वो तो योग में पराकाष्ठा थी। उनकी सब कुछ उन्होंने जान लिया। तो पतंजलि ऋषि ने कहा कि तुमने यह जो तुम उठ के गए हो इस वजह से यहां के वातावरण में एक अलग तरीके की तरंगे उत्पन्न हुई जिससे इसके अंदर जिज्ञासा आई और यह सब कुछ भस्म हुआ। तुम अपना ज्ञान केवल एक बार ही रखोगे तुम्हारे दिमाग में रहेगा। फिर तुम भूल जाओगे। इस प्रकार की बात बोली श्राप दिया और पतंजलि ऋषि वहां से चले गए कि फिर क्या करूं? तो वह भी थे तो विद्वान ही। उन्होंने सारा ज्ञान जो है वह पहले पीपल के पत्तों पर या किसी पत्ते पर लिखा जाता था। उन पत्तों पर लिखा और अपना सारा ज्ञान भूल गए और उन पत्तों को एक जगह रखकर स्नान करने गए कि मैं जब स्नान करके आऊंगा तो वापस इस ज्ञान को अपने अंदर धारण कर लूंगा। और जैसे ही वो स्नान करने गए और इधर से एक बकरी आई और वो उस ज्ञान को खाने लग गई। उस ज्ञान को खा गई। अब वो जैसे ही देखा वो भागे-भागे आए। और उन्होंने उस बकरी को भगाया। फिर जो बचा पूछा ज्ञान है वह 195 योग सूत्र के अंदर हम मानते हैं। इस प्रकार की यह कहानी है जो कथा हमें बताई जाती है। अब इसमें कई चीजें हैं जो एक्सेप्टेबल है और कई चीजें नहीं भी क्योंकि अगर हम बात करें पतंजलि योग सूत्र की तो योग अथ योगानुशासनम से यह प्रारंभ होता है और समाधि पाद की सिद्धियां आदि तक यह वर्णन करते हुए जाता है।
चार पाद है।
समाधि पाद, साधन पाद, विभूति पाद, केवल्य पाद
और 55 प्रथम पाद में 55 सूत्र है द्वितीय पाद में 55 सूत्र है तृतीय पाद में 51 सूत्र है और चौथे पाद में 54 सूत्र है इस प्रकार से इनकी सूत्रों की रचना है। अब हम कभी-कभी विचार करते हैं। हमारा प्रश्न था तो उन्होंने हमारे जो गुरुजन है उन्होंने हमें बताया कि यह योग का ज्ञान जो है यह पूर्ण नहीं क्योंकि योग मात्र इतना सा 195 सूत्रों में इसको आप नहीं जोड़ सकते। इसके अलावा बहुत कुछ है जिसकी अनुभूति हमारे लिए करना जो है सरल नहीं है। इस वजह से इस कथा के माध्यम से वह हमें बताते हैं कि क्यों यह पूर्ण नहीं है। तो यह पतंजलि योग सूत्र और पतंजलि पूरी पूरी ये 195 योग सूत्र आपके सामने इस प्रकार से है




