Monday, January 26, 2026
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नारी शक्ति :- कुञ्ज गली की बेटी महिलाओं की शक्ति :: डॉ लक्ष्मी गौतम

प्रश्न:- नारी शक्ति से आप क्या समझती हैं ?
उत्तर:- डॉ लक्ष्मी गौतम कहती हैं कि पूरे विश्व में यदि किसी देश को एक मातृ शक्ति के रूप में जाना जाता है तो वो एक भारत देश ही है जिसे भारत माता कहा जाता है। मेरा मानना है कि नारी शक्ति जो एक ईश्वर ने और प्रकृति ने एक नारी को बनाया है और उसमे स्वयं में इतनी शक्तियां का पुंज समाहित कर दिया है। कि उसे शक्तियों को जाग्रत करने कि आवश्यकता भी नहीं होगी क्यूंकि परिस्थिति ही उसकी शक्तियों को जाग्रत कर देती हैं।
क्यूंकि हमारे सामने ऐसी कुछ महिलाएं हैं जहाँ समय समय पर हमारे देश की जो महान नारियाँ हुयी हैं। उनका इतिहास ऐसा नहीं है की वो बहुत बड़े परिवार से या समृद्ध शाली परिवार में जन्म हुआ है और वहां पर उन्हें साडी सुविधाएँ मिली। ऐसी भी कुछ महिलाएँ हैं जिन्हे जन्म से शायद दो समय का भोजन भी तन पर पहनने के लिए कपडे भी बहोत ही मुश्किल से मिलते थे लेकिन फिर भी उन्होंने इतिहास कायम किया। आपको बता दें की नारी शक्ति में देवी सरस्वती, काली, दुर्गा, और लक्ष्मी जी का स्वरुप है कि शक्ति की , संस्कृति की विधा की लक्ष्मी की प्रतिक है जो सभी विभाग हैं। जो हमारे सनातन धर्म में एक जो बंटवारा भी हुआ है तो जितने भी महत्वपूर्ण विभाग हैं भगवान के वो सब देवियों को दिए गये हैं। और हम महिलायें उस शक्ति पुंज से कुछ शक्तियों को देख कर, समझ कर कुछ कोशिश करते हैं की वो हर एक बेटी के अंदर आये शक्तिपुंज और और बेटी इस देश के लिए समाज के लिए इस राष्ट्र के लिए कुछ अच्छा कर सके।

प्रश्न:- क्या आपको लगता है की इतिहास के पन्नो में कई एसी महिलायें जो अपने समय की वारियर रही हैं। आज वो गम हो गयी हैं?
उत्तर:- यदि इतिहास देखेंगे तो हमारे ऋक्षि मुनियों की जो पत्नियाँ या सहधर्मणि रही हैं। उदाहरण के लिए देवी अनसुइया, माता सीता, द्रोपदी, कुंती गांधारी ये सब महिलायें हैं। आप गांधारी को यदि दूसरी दृष्टि से देखे गें तो वो एक इतनी पतिव्रता स्त्री थी। की आज के समय में हो सकता है की कुछ लोग उसका उपवाद करें की उन्होंने आँखों में पट्टी बांधने की वजाय उनको अपने पति का हाँथ पकड़ कर चलना चाहिए। तो वो एक राजा थे उनके लिए बहोत सारे नौकर चाकर सेवक थे पर गांधारी ने उस पतिव्रत धर्म को निर्वाहन करते हुए की मेरे पति यदि इस संसार के सुख को नहीं देख सकते प्रकृति के रंगों को नहीं देख सकते तो मैं भी उसी धर्म का पालन करूंगी एक दृष्टि से वो उचित था। भले ही दूसरी दृष्टि से आज का जो आधुनिक युग की महिलाएँ हैं वो उसको उचित नहीं मानती हैं पर मैं पतिव्रत धर्म का एक अनूठा उदहारण मानती हूँ।
जैसे सावित्री का उदाहरण है जिसने यमराज से अपने पति के प्राणों को वापस मांग लिया था। द्रोपदी का चीरहरण जब हुआ तो स्वयं भगवान श्री कृष्णा उसके वरदान बन कर आये और उसकी इज़्ज़त को बचाया तो हमारा इतिहास ऐसी महिलाओं के इतिहास से भरा हुआ है।
 
प्रश्न:- आपसे जानना चाहूंगी की आपने कनकधारा फाउंडेशन की शुरुआत क्यों की ?

उत्तर:- डॉ लक्ष्मी गौतम जी वृंदावन की बेटी है इनके पूर्वजों का इतिहास यहाँ लगभग 450 वर्ष पूर्व है। मेरे पिता जी स्वर्गी श्री कन्हैया लाल गौतम वृंदावन के तीर्थ पुरोहित थे। एक ब्राहण कुल में जन्मी तीर्थ पुरोहित परिवार में जन्म मैं।
बचपन से ही मैंने देखा कि देश के दूर दराज़ राज्यों से यहाँ पर भक्त आते हैं विशेषकर उसमे पश्चिमबंगाल से भक्त आते हैं। और उन भक्तों में महिलाओं कि सख्यां ज्यादातर होती है। उसमे भी ज्यादातर ऐसी महिलाएँ होती है जो विधवा है जिनकी सफ़ेद साड़ी मैली कुचली , माथे पर सिंदूर नहीं कृषिका बीमार सी। तो बड़ा अजीब सा लगता था कि एक तरफ तड़क भड़क पहने हुयी साड़ी माथे पर दमकता हुआ सिन्दूर हाँथ में साखा और एक तरफ कृषिका बीमार सी। तो बचपन से ही मेरे मन में एक जिज्ञासा हुयी कि महिलाएँ दो तरह कि कैसी और मन में यह सवाल कौंधा करता था पिता जी से पूछा तो छोटा समझ कर उन्होंने कोई जवाब नहीं देते थे। फिर ये सब देखते हुए आगे चल कर इन सब चीजों पर शोध किया और लोगो से पूछा बात चित कि तब पता चला कि पश्चिम बंगाल में ऐसी महिलाएँ क्यों होती हैं? क्यूंकि आज भी वहां पर बेटियों का बाल विवाह कर दिया जाता है ३०-४० के पुरुष के साथ तो उन पुरुषो का स्वर्गवास भी जल्द हो जाता है और जब जो विधवा हो जाती हैं तो उनको अपसगुन माना जाता हैं उन्हें बासी चावल पानी में भिगो कर दिया जाता हैं जिससे इनका तामसिक भावनाये उद्दीप्त न हो और उन्हें सामाजिक रूप से प्रताड़ित करते भी हैं।
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