उज्जैन यात्रा के दौरान जब गली में पहुंचे तो अपने घर के द्वार पर बैठी दादी ने हंसकर पूछा कहां से आए हो और क्या काम है? मन तो किया इस हंसी को गले लगाकर ये समझ लूं कि जिसके दर्शन करने आए हैं उस प्रभु से पहले साक्षात भैरवी के दर्शन हो गए हों। दादी सरकारी नौकरी से रिटायर है, और इस उम्र में मस्ती में हैं । बाती बेचती हैं और अंदर नहीं बैठती बाहर की हवा का आनंद लेती हैं। बोलीं महाकाल की भक्ति का रस है, वो सारी इच्छाएं पूरी करते हैं। आताल पाताल भैरव के आशीर्वाद से अभी भी काम करती हूं। दादी को देखकर मुझे आनंद आ गया और आनंदमय होकर भैरव विमर्श के बाद बच्चों के साथ ‘हर हर महादेव’ के नारे लगाकर हम अगले भैरव की ओर प्रस्थान कर गए। दादी से कहा है आपकी बाती को प्रमोट करेंगे और दिल्ली आओगी मैं टिकट भेजूंगी, जोश में बोलीं आऊंगी पक्का।




