जम्मू और कश्मीर से शिक्षिका मृगनयनी जी सबसे पहले टीईटी टेस्ट के बारे में बताती हैं कि यह जो हमारी नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन [एनसीटीई] 2001 में रेगुलेशन इन्होंने पास किया। उस रेगुलेशन में कहा कि शिक्षकों का टेस्ट होना चाहिए। वो रेगुलेशन उसके बाद आरटीई राइट टू एजुकेशन एक्ट आया 2009 में। अब 2009में जब ये ये एक्ट आता है तो उसने कहा कि हम एनसीटीई 2001 के सभी रूल्स को फॉलो करेंगे। मतलब हम शिक्षकों के टेस्ट लेंगे। ये आर्डर जब बिल्कुल फ्रेम हो के आ गया तो जब ये फाइनल शेप में आया तो ये निर्णय दिया गया कि 2001 से जो पहले के शिक्षक है उनका टेस्ट जो है नहीं लिया जाएगा और ये इंप्लीमेंट हो जाएगा 2009 से। बात सब फॉलो कर रही है कि 2001 के पहले से जो शिक्षक थे क्योंकि ये फ्रेम ही 2001 में हुआ था। ये शिक्षक पात्रता परीक्षा जो था 2001 में नेशनल काउंसिल फॉर टीचर्स है उन्होंने ये ये काउंसिल में ये पास हुआ और ये 2001 में आ गया। 2009 में जब राइट टू एजुकेशन एक्ट बना उसमें ये इंप्लीमेंट हो गया। और 2001 से पहले के टीचर को एक्सेंट कर दिया गया। अब हमारा स्पेशल स्टेटस रहा जम्मू और कश्मीर में हमारा स्पेशल स्टेटस रहा जिसकी वजह से ये हमारी सरकार ने इसको अपने इंप्लीमेंट नहीं किया क्योंकि हमारा अपना कॉन्स्टिट्यूशन था। 2019 में ये इंप्लीमेंट हुआ जम्मू कश्मीर में। तो 2019 से पहले के टीचर्स को क्यों इनवॉल्व किया जा रहा है? आप टेस्ट करवाइए। टेस्ट से हम डरते हैं क्या? लेकिन कोई नियम और कानून होने चाहिए। हम बात ये स्वाभिमान का है। स्वाभिमान सर्वोपरि ऐसा थोड़ी कि बीच में आप रूल बनाएंगे और हम उनको फॉलो करेंगे। ऐसा नहीं होगा। आपको हमारी बात सुननी और समझनी पड़ेगी। एलिजिबिलिटी टेस्ट से परेशानी नहीं है। टेस्ट है कि जो रूट बीच में फ्रेम आप कर रहे हैं। ये बिल्कुल गलत है। हम जो टीईटी टेस्ट का बिल्कुल भी हमारी तरफ से समर्थन नहीं है और आपके चैनल भारत मेरे साथ के माध्यम से हम ये सभी शिक्षकों को भी स्पष्ट करना चाहते हैं कि हमारा एक ही निर्णय है कि टेस्ट नहीं देंगे। ये हमारा आखिरी निर्णय रहेगा।
ये एक्सप जो किए गए थे टीचर्स क्या वो भी इसके खिलाफ हैं ?
2001 से पहले तो सारे एक्स्प हो गए क्योंकि रूल ही 2001 में बना तो वो एक्स्प हो गए अब यहां कश्मीर में रूल 2019 में बन रहा है तो पहले वालों को कैसे ये इंप्लीमेंट कर पाएंगे यहां एक्चुअली कश्मीर में कुछ भी एलिममेंट्री लेवल पे रिक्रूटमेंट होती ही नहीं है जस्टिफाई कैसे कर पाएंगे टेस्ट को कि ये मेरे साथी जो है ये एलिममेंट्री के हैं या हाई के हैं या हायर के हैं।मेन चीज है कि गवर्नमेंट नहीं बता पाएगी ना कि हम तीन साथी बैठे हैं। कौन एलिममेंट्री में है? आपका कोई पैरामीटर ही नहीं है।
जैसे दिल्ली में टीजीटी पीजीटी होता है। जैसे जूनियर क्लासेस का हम टीजीटी कहते हैं ?
जी हमारा स्पेशल स्टेटस है। यहां कोई टीजीटी कोई टीजीटी नहीं। यहां टीचर से मास्टर, मास्टर से हेड मास्टर। हमारा एक अपना हमें वो पे स्केल भी नहीं दिए हैं टीजीटी पीजीटी के। हम तो उनके लिए रो रहे थे कि चलो यूटी बना है तो हमारे पे स्केल हो जाएंगे टीजीटी पीजीटी वाले बट यहां टीजीटी पीजीटी नहीं तो पेस्केल कहां से देंगे कश्मीर में इसकी संभावना बिल्कुल भी नहीं है
जो लंबे समय से जो शिक्षक है वहां पर उनको भी ये परीक्षा देना है या नहीं ?
मैं आपसे स्पष्ट रूप से बताऊंगी कि ये एग्जाम सिर्फ जिनके पांच साल सर्विस के लिए रहते हैं उन्हें नहीं देना। बाकी इन्होंने बोला है सबको देना है।




