Monday, January 26, 2026
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किसी भी मंदिर का निर्माण करने की प्रक्रिया क्या है ?

विषय:- किसी भी मंदिर का निर्माण करने की प्रक्रिया क्या है ?
सीरीज़:- Live // No Filter
अतिथि:- अरविंद शाह, कीर्ति कांत शर्मा
नमस्कार, भारत मेरे साथ चैनल के सीरीज लाइफ नो फिल्टर में आप सभी दर्शकों का स्वागत है। भारत मेरे साथ चैनल में आज का जो विषय है वो है।किसी भी मंदिर का निर्माण करना आज के समय में उसकी प्रक्रिया क्या है और कितना सही है?इस विषय पर बात करेंगे सुरभि सप्रू भारत मेरे साथ चैनल के संचालिका और साथ में जुड़ेंगे अरविंद शाह कीर्ति कांत शर्मा जी जो जम्मू एंड कश्मीर रिसर्च सेंटर, दिल्ली में कार्यरत हैं।और कीर्ति कांत शर्मा जी शारदा लिपि और साथ में अन्य लिपियों पर भी रिसर्च कर रहे हैं। आज मंदिर के निर्माण के विषय में इसलिए बात करना उचित है क्योंकि आज का जो समय है मंदिरों पर विशेष कार्य हो रहा है। जैसे कि अयोध्या के राम मंदिर वाराणसी में भोलेनाथ जी का मंदिर है काशी विश्वनाथ मंदिर अन्य स्थानों पर जम्मू कश्मीर में जो मंदिरों का निर्माण हो रहा है, इन विषयों पर बात करना बहुत ही महत्वपूर्ण विषय है। के मंदिरों का निर्माण किस प्रक्रिया से किस आधार पर काम करना चाहिए?

क्योंकि ये जो मंदिर है ये किसी धर्म पर किसी एक समुदाय को लेकर होता है। एक प्रतीक होता है की हमारा जो वर्तमान है, इससे जो हमारे युग चले आये हुए हैं, उनके आधार पर किस प्रक्रिया से कार्य चल रहा था, उनकी संस्कृति क्या है? उस मंदिर में सत्य कितना है? और ये जो मंदिर है एक युग का प्रतीक होता है।की ये किस युग में, किस काल में किसके शासनकाल में बना हुआ था?और किस लिए? एक मंदिर से एक धर्म को एक शिक्षा को एक भक्ति का करने का मार्ग इत्यादि। क्योंकि मंदिर एक धर्म के आस्था का केंद्र होता है। मंदिर एक धर्म के लिए अस्तित्व है।वहाँ से उस धर्म के लोगों का एक भाईचारा, एक प्रेम आगे आता है। और मंदिरों से एक धर्म को लेकर एक शिक्षा का उत्पत्ति होती है।मंदिरों में एक सनातन धर्म में एक मंत्र है।मातृ देवो भवा, पित्र देवो भवा, आचार्य देवो भवा, अतिथि देवो भवा।

इसका ये मतलब है।की सबसे पहले इससे पहले हम अपनी माता की पूजा करें, अपनी माँ का सम्मान करें, अपने पिता का सम्मान करें, पितातुल्य जो हमसे है, हमारे हैं, उनका सम्मान करें। फिर अपने गुरु लोगों का सम्मान करें। जो हमारे गुरु हैं उनका सम्मान करें। साथ में है अतिथि देवो भव आर मतलब जो भी अतिथि हमारे द्वार पर आया है, हम उनका सम्मान करें।ये मंदिर से एक संस्कृति निकलती है एक समाज के लिए एक समाज के लिए उपदेश निकलकर आता है।एक नई दिशा निकल कर आती है की हमें जो पृथ्वी पर है सभी का सम्मान करना चाहिए। अपने गुरु, अपने माता, अपने पिता, आए हुए अतिथि अपने से छोटे लोगों को और जितने भी जीव जंतु हैं। सभी का सम्मान करना चाहिए।

क्योंकि आज कि समय में कोई भी कहीं पर किसी भी प्रकार से मंदिर का निर्माण कर देता है।कभी नहीं जानते कि मंदिर को किस दिशा में, किस दशा में, किस स्थान पर और किस भाव से रखना चाहिए।क्योंकि मंदिर जो है वो सनातन धर्म के अस्तित्व पर टिका हुआ है।इन सभी।बातों का, मंदिर का, धर्म का, सनातन धर्म का जाति वर्ण में का महत्त्व जानने के लिए
भारत मेरे साथ चैनल की सीरीज नो फिल्टर में हो रही वार्तालाप सुरभि सप्रू के द्वारा आए हुए अतिथि कीर्ति कांत शर्मा और अरविंद शाह जी की पूरे विचार को सुनने के लिए भारत मेरे साथ चैनल के नीचे दिए गए लिंक को क्लिक करें और चैनल को लाइक, सब्सक्राइब, शेयर और कमेंट्स जरूर करें।

Note: – शो पर बोली गयी कोई भी बात चैनल के द्वारा लिखित नहीं है जो भी अतिथि या प्रवक्ता बात कर रहे हैं वो उनके खुद की विचारधारा हैं भारत मेरे साथ चैंनल उसके लिए जिम्मेदार नहीं है।

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