सीरीज़:- सही क्या है ?
विषय:- काकोरी कांड का सच
अतिथि:- श्री मदन लाल वर्मा (क्रान्त जी)
शीर्षक:- नमस्कार भारत मेरे साथ चैनल में आप सभी दर्शकों का स्वागत है आज भारत मेरे साथ की संचालिका सुश्री सुरभि सप्रू जी श्री मदन लाल वर्मा (क्रान्त जी ) से बात करेंगी कि
काकोरी कांड का सच क्या है ?
काकोरी कांड करे विषय को लेकर मदन लाल वर्मा क्रान्त जी कहते हैं कि दो शब्द होते हैं। करतूत और कांड। लोग कहते भी हैं कि क्या कांड करके आये हो तुम्हरी क्या करतूत है।
वैसे तो कांड बहुत है तुलसीदास जी ने राम चरित्र मानस में कई कांड लिखे हैं सुन्दर कांड, बाल कांड, लंका कांड, इत्यादि परन्तु सरकार ने चौरा चोरी एक कांड हुआ था उसको काकोरी षडयंत्र केस कहा था यानि कि काकोरी षडयंत्र कांड
ये संकर ने इस लिए नाम दिया था क्योंकि हर दूसरे दिन कोई न कोई कांड होता रहता था। और १९२५ से शुरू हुआ था उसमे सेना के जितयंबे भी सिपाही थे सभी लड़े थे। और किसान गांव से ब्रिटिश सरकार के विरोध में लड़ रहे थे।
आपका बता दें काकोरी कांड के साथ मैनपुरी कांड भी हुआ था इन दोनों कांडो के सूत्रधार राम प्रसाद बिस्मिल थे। राम प्रसाद बिस्मिल का जन्म शाहजहां पुर में ११ जून १८९७ सन में हुआ था इनका पड़ने लिखने में मन नहीं लगता था जिसकी वजह से अपने पिता से दांत भी कहते थे। लेकिन शैतान बहुत ही थे। और जैसे जैसे ये बड़े होते गए ये डकैती डालना शुरू कर दिया था। और डकैटी के पैसे से हथियार खरीदते किताबे लिखते थे अपने ऊपर लुटे हुए पैसे खर्च नहीं करते थे। फिर कुछ समय बाद इन्होने कसम खायी कि अब हम जनता को नहीं लूटें गें। अब सरकार को लूटें गें। क्योंकि उस समय भारत में ब्रीटिश की सरकार थी। और इन्होने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ में प्रतिरोध कर न शुरू कर दिया। फिर इसके साथ ही एक संगठन बनाया गया जिसमे महात्मा गाँधी भी शामिल थे। उस समय महात्मा गाँधी लन्दन से पढ़ाई करके आये थे और उन्हें भारत वासियों से बात करने के लिए कहा गया था कि सभी किसानो के घरों से एक एक लड़का सेना में आये और देश की रक्षा करे। ब्रिटिश सरकार करे लिए । जब १९२१ सन में अहमदाबाद अधिवेशन हुआ कांग्रेस का उसमे राम प्रसाद बिस्मिल, अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ , हसरत मोहनी और इनके साथ महात्मा गाँधी और शंकराचार्य भी थे और इन लोगो ने जा करके मंच पर कब्ज़ा कर लिया।


इसके बाद उत्तर प्रदेश गोरखपुर में चौरा चोरी के ठाणे में हमला कर दिया गया जिसमे दो सिपाही मर गए तो महात्मा गाँधी जी ने इस आंदोलन से अलग होगये उन्होंने कहा कि मैं हिंसा नहीं चाहता हूँ। इसके बाद रामप्रसाद बिस्मिल ने अपने साथियों के साथ एक मुस्लिन लीग पार्टी बनाई फिर इन्होने आंदोलन करना शुरू कर दिया जिसमे काकोरी कांड भी हुआ इस कांड में १० लोग ही शामिल हो पाए थे इनके नाम है मुरारी लाल केसर चक्रवर्ती, ठाकुर रोशन सिंह, अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ, और अन्य लोग थे जो बहार से आये थे।
काकोरी कांड की बैठक शाहजहां पुर में राम प्रसाद बिस्मिल जी के माकन में हुयी थी। ……………….।
नोट:- काकोरी कांड के पूरा सच जानने के लिए मदन लाल वर्मा (क्रान्त जी) के माध्यम से निचे दिए गए लिंक को क्लिक करे और भारत मेरे साथ चैनल को लाइक सब्स्क्रिबे शेयर जरूर करें।




