Monday, January 26, 2026
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कश्मीर में हिन्दू मंदिर और हिन्दू धर्म की संस्कृति !

नमस्कार भारत मेरे साथ चैनल के सभी दर्शकों का स्वागत हैं। भारत मेरे साथ चैनल की संचालिका सुश्री सुरभि सप्रू जी पहलगाम घटना के बाद श्रीनगर हिन्दू मंदिर माता खीर भवानी तुलमुल में गयी थी। और आज कश्मीर में जो हिन्दू धर्म के ससाथ हो रहा है उसके विषय में बाते करेंगीं। और सुश्री सुरभि सप्रू और भारत मेरे साथ चैनल का सिर्फ एक ही उद्देश्य है। कि चैनल में राजनीती विषय नहीं होगा चैनल सत्य ,साहित्य, नारीशक्ति, संस्कृति, धरोहर पर बात विशेष बातचीत होती है और हमेश होगी भी।

अब बात करते है जो कश्मीर ब्राह्मण को 1990 सन में विस्थापन हुआ था उस पर आज भी वो हिन्दू समाज जो है जम्मू और कश्मीर में इनकी वहां पर बहुत साड़ी समस्यां हैं और बहुत सारी समस्या ऐसी भी है जिनका निवारण करना बहुत मुश्किल है।

सुश्री सुरभि जी ने जब कश्मीर गयी और देखा और बात किया वहां के लोगो से तब कहती हैं कि कश्मीर के हिन्दू जो जो है वो ज्यादा पॉवरफुल हैं क्योंकि वो कश्मीर में ही रहे कर और सभी जाती धर्म की समस्या की वास्तविकता को समझने की कोशिश करते हैं। जो हम जानने का प्रयास भी दिल्लू में बैठ के करें तो नहीं कर सकते हैं। इसीलिए मेरा विचार बना की मैं वास्तविकता को देखने के लिए कश्मीर जाऊँ। और वहां पर हिन्दू मंदिर की स्तिथि देखूं। और सुरभि सप्रू जी कश्मीर से ही हैं तो वो अपनी कुलदेवी के भी दर्शन करने का भाव मन में लेकर गयी। और उसके बाद कश्मीर को लेकर कई सारी चर्चा भी की। सबसे पहले मैं आपको यह बता दें कि बहुत सारे लोग जो हैं इस समय पर अलग अलग इंसेंटिव के साथ कश्मीर पर अलग अलग काम कर रहे हैं। हम किसी को कोई क्रीटसीज़े न करते हुए यही कहेंगे कि बहुत सारे लोगों का इंट्रेस्ट कश्मीर के टूरिजियम को फ़ैलाने का भी है। कश्मीर के टूरिज्म को बढ़ावा देने का भी है। और वह हमारे ही समाज के लोग हैं। लेकि जो कश्मीरी हिन्दुस् है वह कुछ और ही कहते हैं वहां पर !

जब मैं माता खीर भवानी मंदिर तुलमुल श्रीनगर को कवर करके दिल्ली वापस आयी तो बहुत सारे कश्मीरी हिन्दुओं के मकान हमे दिखाए गए जो बहुत ही ध्वस्त स्थिति में हैं। यह समस्या तब से है जब से ये कश्मीरी हिन्दुओं का विस्थापन 1990 से हुआ। और वहां के हिन्दुओं की एक बहुत बड़ी गरीबी की स्थिति है। जो की विस्थापन से पहले नहीं थी। ऐसी ही समस्या जम्मू में भी देखने को मिलती है जो कश्मीर से जा कर वहां पर डेरों या कह सकते हो कैंप में अभी भी ठहरे हुए है वो राशन पानी बिजली तक मुहताज़ है शिक्षा की बात ही छोड़ दें आप। ये समझ लें आप की वो अपनी बेटियों की शादी नहीं करा पा रहे हैं।

इसी कड़ी में बहुत सारे मंदिर हैं और इन मंदिरों की अपनी अपनी राजनीती है यह एक अलग समस्या है। क्योंकि जैसा वहां के लोगो से बातचीत के दौरान बताया गया है कि पिछले वर्ष 40 हज़ार कश्मीरी पंडित माता खीर भवानी मंदिर पहुंचे थे। वहीँ इस बार मुश्किल से 5000 लोग भी नहीं मेले में पहुंचे हैं। और आने वाले समय में कितने लोग यहाँ पर आएंगे किसी को कुछ भी नहीं पता है।


अब बहुत सारे लोग जो हैं वो कश्मीर में पुराने मंदिरों को डॉक्युमेंट्स कर रहे हैं उनको खोलने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन इसमें राजनित्री भी बहुत है। क्योंकि हर मंदिर अब कोई न कोई ट्रस्ट के अंतर्गत है।

इस कड़ी में कश्मीर पंडितों का जो अपने नियम हैं जो अपने प्रॉपेक्टीवे है वह क्या किसी मुस्लिम कम्युनिटी या किसी दूसरे धर्म की कम्युनिटी या फिर डोगरा कम्युनिटी हमारी वहां पर जो है। क्या हम उनसे अलग कैसे दिख रहे हैं और क्या हमारा बजूद हैं।

हमारे कश्मीरी ब्राह्मणो की अपनी जो मातृभूमि कश्मीरी हैं। वहाँ पर हमारा सभी का बजूद क्या है?
नोट:- श्रीनगर तुलमुल माता खीर भवानी मंदिर पर और कश्मीर हिन्दू पर पूरी बातें सुनने और देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक को क्लिक करें और साथ में भारत मेरे साथ चैनल को लाइक, शेयर, सब्सक्राइब, जरूर करें।

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