विषय:- कथक नृत्य और नारी सशक्तिकरण
सीरीज:- नारी शक्ति
अतिथि:- श्रीमती प्रतिभा सिंह
स्थान:- भारत मेरे साथ स्टूड़िओं दिल्ली
शीर्षक:- भारत मेरे साथ के माध्यम से बताना चाहूंगी कि भारत मेरा देश मेरी संस्कृति मेरी वानगी उसे खैती हुयी साहित्यिक जगत में हम बहुत ही अच्छे से भारत की परम्परा को निभाते हैं। भारत मेरा देश है सोचती भी हूँ लिखती भी हूँ और बोलती भी हूँ। और वानगी हमारी लेखनी में आती है और हम साहित्य सहजते हैं और हमारी संस्कृति हमारी बोली में आती है। परम्परा में आती है। गुरु शिष्य के परस्पर संवाद के साथ हम बड़े होते हैं हमारी भू जोई है हमारी मातृभूमि होती है। इस मातृभूमि को सत सत नमन करते हुए हम भारत की एकता परम्परा और संवर्धन का काम करते हैं। जोकि आप भारत मेरे साथ चैनल के माध्यम से कर रही है इसके लिए सुरभि सप्रू और भारत मेरे साथ चैनल को बहुत बहुत बधाई और आपका आभार व्यक्त करती हूँ। और सोशल मिडिया प्लेटफार्म एक ऐसा माध्यम बन गया है। जो हमारे हज़ारों लोगों को जोड़ने का काम करता है। और जोड़ने का काम कलाएं करती हैं। क्योंकि कलाएँ हमारी उन्मुक्त होती हैं। स्वतंत्रता हमे देती है हम पछी की भांति उड़ते हैं और अपने सपने गढ़ते हैं।
श्रीमती प्रतिभा सिंह जी की कविता की पंक्ति …………।
सुर लिए जा रहा है, दिवा लिए जा रहा है, मेरे वसंत को।
वसंत का आना और आकर चले जाना क्योंकि
सुर के साथ ही हमारा वसंत चला जाता है।
वसंत में आम की डालियों पर बौर आने को है व्याकुल,
पत्तों से नव यौवन का सुगंध लिए जा रहा है।
सुर लिए जा रहा है दिवा लिए जा रहा है।।
कथक जीवन जीवन है हमारा उन्माद भरता है हमारी संस्कृति को पिरोता है प्रकृति नाचती है। और हम लोग भी नाचते हैं।। हमारे साथ प्रकृति इस तरह नाचती है जैसे स्वयंभू नाच रहे हैं। स्वयंभू यानि हमारे कला जगत में उसका बहुत ही उच्च स्थान माना जाता है शिव जी का।
शिव ने अपनी प्रकृति को अपने धाराओं पर जैसे वो चन्द्रमा हैं तो हम चाँद की तरह देखते हैं उनका जो नाग है तो वो हम गले में पिरोते हैं उनकी गंगा की धरा है वो जल में तरंगे उत्पन्न करती हैं।


प्रश्न:- देश की नारीशक्ति कैसी होनी चाहिए ?
उत्तर:- नारी शक्ति से सम्बन्ध मेरी माँ से होता है जब बच्चा जन्म लेता है तो वो नाल वद्ध होता है। और लोरियां भी माँ ही सिखाती है और माँ के जहाँ में में जब लोरियां आती है तो उसका उन्माद जो होता है उसका जो वसंत होता है उसके जो त्यौहार होते हैं वो सब अपने बच्चों में देखती है। और वो बधाई गीत भी गाती है।
“तीन लोक के नाथ कन्हैया ने जन्म लियो है।
कन्हैया ने जन्म लियो है मैया ने जन्म दियो है।। “
प्रतिभा सिंह जी बिहार की मिटटी से हैं ये दिल्ली १९९६ में आयी थी। ये बताती है कि मैं यहाँ तक कैसे पहुँच पायी हूँ। अपनी मिटटी की खुशबु के साथ जुडी हुयी हूँ। और यह जो मेरे घर से परम्परा से चला और उसके माध्यम से हमारे घर में सभी बड़े बड़े कलाकार और संगीतज्ञ का आना जाना होता रहा है। क्योंकि पिता जी ने ये कला की परम्परा को चलाया था और वो खुद भी एक रंगकर्मी थे तो उनसे वो जो चलन चला तो आज तक हमारी परम्परा में है प्रतिभा सिंह जी के पति डॉ सुमंत कुमार भी रंगकर्मी हैं। तो ब्यूरोक्रेट्स को भी मैं समझ सकती हूँ और समाज को पिरोती हूँ एक तरह से। और आगे के पीढ़ी में बेटा भी छाऊ सीखता है और साथ में करता भी है।।
प्रश्न:- कथकजो पहले हुआ करता था तो क्या आज भी वैसा ही है या कुछ बदलाव हुआ है ?
उत्तर:- इसमें आपको बताएं कि कलाओं में बदलाव तो आना एक वास्तविकता है क्योंकि शरीर बदलता रहता है। और हम शरीर से कलाओं को दर्शातें भी हैं। और घराने हमारे अलग अलग पलायन होते चले गए हैं। हम घराने का नाम तो देते हैं लेकिन वो घृणा गांव और क़स्बा होता है।
जिस परम्परा की हम बात करते हैं जैसे इस समय हम दिल्ली से हैं तो मैं दिल्ली घराना तो नहीं कह सकती हमारी परम्परा आती और जाती है। कथक नृत्य भी एक व्यापक रूप लेता है। हमारा कथक कथा कहे तो कथा कहलाए यह कहने वाली बात है। लेकिन कथा वाचन और संगीत।
पहले कथा वाचन से ही हमारा कथक निकला और जब मुग़ल कालीन दरबार आया तो वहां से लखनऊ घराने की उत्पत्ति होती है। लेकिन लखनऊ घराने की उत्पत्ति का वो स्थान नहीं है।
क्योंकि हमारे मंदिरों से ही निकली और उपजी हुई कलाएँ हैं। जिसे मंदिरों ने सहेज सवार और संवर्धन का काम किया। आज भी वो परम्परा हमे देखने को मिलती है। जो दक्षिण भारत में मिलती है। तो हमे अपनी विरासत को एक समकालीन उद्धव के साथ अपनाना और सहजना चाहिए। परम्परा तो हम बनाते हैं। और उसी परम्परा का नाम देते हुए जब हम आगे बढ़ते हैं परम्परा से १०० वर्ष बाद भी उखेरी जायगी पर वो और रूप में उखेरी जायगी। तो इसी तरह से कथक का अपना व्याकरण हैं।
नोट :- भारत मेरे साथ चैनल की सुश्री सुरभि सप्रू जी और श्रीमती प्रतिभा सिंह जी के द्वारा कथक, परम्परा, घराने नारीशक्ति पर विशेष बातचीत को सुनने के लिए नीचे दिए गए चैनल लिंक को क्लिक करें और पूरा सही क्या है एपिसोड को देखें।।




