Monday, January 26, 2026
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आज के समय में स्त्रियों का संघर्ष ?

विषय:- आज के समय में स्त्रियों का संघर्ष ?
सीरीज़:- नारी शक्ति
अतिथि:- लेखिका श्रीमती कनिका शर्मा
शीर्षक:- लेखिका कनिका शर्मा से विशेष बातचीत के दौरान आज के समय में स्त्रियों का जो कॉर्पोरेट सेक्टर में संघर्ष है या परिवार में संघर्ष है।उस पर चर्चा।
वास्तविकता को स्वीकारें और आगे बढ़ें, मिलिए शानदार कनिका शर्मा से। जनरेशन Z की वह सदस्य जो कहती हैं ‘देश पहले’
लेखिका कनिका शर्मा का जन्म दिल्ली करोलबाग में हुआ।इनका पैतृक गांव हरियाणा राज्य में है।उन्होंने अपनी पढ़ाई दिल्ली विश्वविद्यालय से की।इनके माता पिता बहुत ही खुले विचारों के हैं जिनके लिए इनको किसी भी प्रकार से रोक टोक नहीं किया।और ये दिल्ली विश्वविद्यालय से पढ़ाई पूरी करने के बाद अपनी सारी चीजों को देखते हुए संसार की गतिविधियों को देखते हुए इन्होंने हिंदी साहित्य पर काम करना शुरू किया और एक लेखिका के रूप में उभरे कर आयी।

झांसी के रानी के विद्रोही संघर्ष से अब की स्त्रियों के विद्रोही संघर्ष को आप कैसे देखते हैं?
लेखिका कनिका शर्मा जी कहती हैं कि यह पूरी तरह से परस्थितियो के ऊपर आधारित होता है क्योंकि पहले की जो परिस्थिति रानी लक्ष्मीबाई की थी वो एक राज्य के लिए थी, एक देश के लिए थी, अपनी संस्कृति के लिए थी।जो स्त्री गलत कर रही है सिर्फ इसलिए कि उनका समर्थन करना है या फिर दूसरे को गलत दिखाने के लिए ये बोलना की वो भी गलत है।तो दिखाने के लिए बोल रहा है की वो भी गलत है क्योंकि किसी ने अपना बेटा, भाई, पति खोया हैं।तो वो भी एक स्त्री ही है तो आप ऐसा कैसे बोल सकते हैं कि अब आप उस तरफ के पीड़ित आदमी को सहयता नहीं करेंगे क्यूंकि उस पीड़ित परिवार में स्त्री भी है, उसकी माँ भी हैं? बहन की बेटी सभी है तो उसकी सहायता क्यों नहीं करेंगे?

गलत कोई भी हो सकता है, स्त्री भी पुरुष भी।
जब हम लोग शारीरिक रूप से हिंसा के घरेलू उत्पीड़न के बारे में बात करते हैं लेकिन कोई भी मौखिक दुर्व्यवहार,मानसिक उत्पीड़न इत्यादि उत्पीड़न के बारे में बात नहीं करते, वो भी तो उसका हिस्सा ही है। भावनात्मक मानसिक दुरुपयोग भी। बहुत सारी शादी खास तौर पर ऐसा होता है जहाँ पर ये नहीं होना चाहिए कि आपके ऊपर हाथ उठाया जाए। आपको शारीरिक रूप से मारपीट किया जाए या जलाने की कोशिश की जाए।यदि इसका विद्रोह करती है, स्त्री या उसको उस से निकलकर आगे आती है तो वो गलत नहीं है।लेकिन आज इन सारी चीजों से स्त्री को संघर्ष करना पड़ता है।उसको मौखिक दुर्व्यवहार,मानसिक उत्पीड़न इत्यादि इन सारी चीजों से संघर्ष करना पड़ता है।

आज के समय में लड़कियों के माता पिता को कैसा होना चाहिए ?
आज के समय की जो पीढ़ी है।वो शहर सत्र बदी है।मैं कहूँगी तो आज हमारे माता पिता की जो पीढ़ी है, वो आज उस विचारधारा की।से वैसी ही है। ये आखिरी पीढ़ी होगी हम लोगों के लिए जो परंपरा को जो पारंपरिक परंपरा को।लेकर चल रही है।अब आगे आने वाली पीढ़ी।या जो वर्तमान समय में माता पिता बन रहे हैं या इसके आगे जो माता पिता बनेंगे उनकी विचारधारा अब धीरे धीरे पूरी तरह से बदल रही है।एक बात यह भी है कि लड़कियों को लोग हमेशा से थोड़ा समझदार समझते रहे।की एक लड़की है।तो लड़कों के पीछे है, ज्यादा समझदार रहे हैं क्योंकि लड़के जिम्मेदारियां बहुत में बात लेते हैं। यदि वह या पिता बन जाते हैं या अधिक हो जाती है तो थोड़ा सा परिवार के प्रति जिम्मेदार बनते हैं, लेकिन लड़कियां बचपन से ही जिम्मेदार होती हैं।उनको घर की जिम्मेदारी, परिवार की जिम्मेदारी इसके बाद ससुराल की पति की।
इससे पहले की पीढ़ी के माता पिता वो अपने बच्चो को समझाते है। संस्कार परम्परा बताते थे हर एक बात की, कि किस तरह से बैठो, कहा जाओ क्या करो क्या नहीं करो ?लेकिन अब वो सब बाते नहीं हैं। इस पीढ़ी के माता पिता में नहीं है, जो इससे पहले के माता पिता में थी, अब आपके माता पिता में वो नहीं है अब के समय की जो लड़कियां हैं, जिन्होंने पारंपरिक परंपरा को देखा तो है? अपनाया है। अब वो उस परंपरा के खिलाफ़ विरोध कर रही है।उसे बाहर निकल नहीं है इसलिए आगे आने वाली पीढ़ी की जो अपने बच्चों के साथ उस तरह का व्यवहार नहीं कर पाती है।क्योंकि वो परंपरा तोड़ दिया है?अब वो नए विचारधारा के साथ आते।और उनको इसी तरीके से होना भी चाहिए।

सही क्या है ? सात बंधन से बंधा हुआ विवाह या फिर लिव इन रिलेशनशिप !
बॉलीवुड एक्ट्रेस के जवाब पर कनिका शर्मा जो लेखिका हैं उनका कहना है कि बॉलीवुड हमेशा से लेफ्टिस्ट ही रहा है और लेफ्टज़िम भी न बहुत ही मिस अंडर स्टुड कांसेप्ट है। मेरे अनुसार।हम अभी बात कर रहे थे इससे पहले कि सिर्फ लेबल थिंग राइट और लिफ्ट लेकिन ये लेफ्टीज इम कहाँ से आया क्यों आया?किसी को नहीं पता अगर कोई सोचने बैठे भी तो माक्र्सिस्ट कौन?उनकी फिलॉसफी क्या थी? और जो आज लेफ्टिस्ट है वो बिलकुल ही अलग है।

अगर देखा जाये की हमारे कल्चर में बहुत सारे लोग जो पश्चिमी देश की तरफ से आते हैं। पहले क्या था की बहुत सारे लोग आत्महत्या कर लेते थे। बहुत सारी शादियां टूट जाती थी। तलाक भी बहुत ज्यादा हो रहे थे। बच्चों के हालत बहुत ही ख़राब थी क्यूँकि बच्चे अपने घर पर दुर्व्यवहार के माहौल में बड़े रहे होते हैं।
हाँ, ठीक है इसमें लेकिन किसी को भी इस तरीके के व्यवहार में नहीं रहना चाहिए। सभी को अपनी खुशी रहती है की हम अच्छे माहौल में रहें। अपनी जिंदगी को अपनी शादी किस तरीके से पर बर्बाद ना होने दे? और उसमें जो ये कल्चर था ना? उसी समय में ही सारी चीज़े हो जाती थी। तुरंत तत्काल तलाक हो जाते थे। विदेशों में ये मैंडेटरी हो गयी थी कि किसी की इच्छा नहीं है तो विदेशों में तुरंत तलाक अपना कर लेता था।

क्योंकि विदेशों में जो होता है वो भारत के तरीके से कोई ऐसे प्रोफेस नहीं होता है।
इसके पहले ऐसा होता था की माँ है, बच्चे है। तलाक होने के बाद अब बच्चों को किसी को पढ़ी नहीं है। माँ का किसी और से अफेयर हो गया है, वो किसी और के साथ संबंध बना रही होती है। बच्चे इस माहौल को देख रहे होते हैं। इस समय बच्चों के साथ क्या हो रहा है वो अपनी मानसिकता के अनुसार उनको गालियां भी मिलना ही है। सारे समाज के अनुसार ये किसी को कुछ नहीं पता है, ना किसी को कोई फर्क पड़ता है।और इसी मानसिकता को देखते हुए इसी चीजों को देखते हुए बच्चे ड्रग्स लेने लगते हैं।क्योंकि उनको कोई देखरेख करने वाला नहीं है।

सिर्फ एक छोटी सी बात के लिए माता पिता अपना अपना रास्ता चुन लिया है और इन दोनों ने अपने बच्चों के।विषय में नहीं विचार किया है। अगर आपको शादी एक समय की प्रभाती लगती है लेकिन आगे आपको सोचना पड़ेगा कि जीवन में कभी क्या आपको बच्चों की जरूरत पड़ेगी या नहीं पड़ेगी या नहीं पड़ेगी तो बहुत अच्छी चीज़ है। ये आपके विचार है।लेकिन कभी ना कभी तो आपको ऐसा लगा की नहीं? आपको जीवन साथी की आवश्यकता है आपको बच्चो की आवश्यकता है।
ये सब जो पश्चिमी देशों में हो रहा था, लेकिन अब वही।शादी के सात बंधनो में बंध रहे हैं। वो सकं में शादियां कर रहे हैं। वो अपने पूरे जीवन के लिए भारतीय विवाह परम्परा के अनुसार अपना विवाह कर रहे हैं । वो भारत आकर शादियां कर रहे हैं।

लेकिन वही पर अब भारत की संस्कृति में भारत की परंपरा में विदेशी परंपरा को अपना रहे हैं। वो लिव इन रिलेशनशिप में रहना चाह रहे है। वो तुरन्त तत्काल तलाक लेना चाहते हैं। वो एक साथ नहीं रहना चाहते हैं। बच्चों की परवाह नहीं कर रहे हैं ये सारी चीजे।अब भारतीय लोग विदेश की संस्कृति को अपना रहे हैं।
पहले जो भारत की संस्कृति थी, उसमें एक युग बनता था की आपका भी बाल जीवन है अब बालपन में खेलेगा तो ये आपका जो किशोरावस्था में होंगे। फिर गृहस्थ अवस्था आती थी। इस तरीके से आपके तीन से चार जीवन चलते थे लेकिन आज के समय वो नहीं रहा।

एक महिला दूसरी महिला के प्रति प्रतिस्पर्धा क्यों रखती है?
कनिका शर्मा ये कहती है कि ये सभी को समझना होगा इस बात को किये जो प्रतिस्पर्धा कहाँ से क्यों आई? क्योंकि महिलाओं को हमेशा से बराबरी का दर्जा नहीं मिला है।आपको और मेरी पीढ़ी यानी की आज की पीढ़ी से पहले वाली पीढ़ी की जो महिलाएं थी, वो बहुत ही विद्रोह करके परिवार के समाज के खिलाफ़ जाकर अपना एक अस्तित्व अपना एक मुकाम बना पायी हैं ?यहाँ तक कि किसी भी विभाग में हो।यहाँ तक कि परिवार में भी इस तरह के भेदभाव होते हैं।कि कोई सास है ननंद है छोटी बहुएं, बड़ी बहू है यह सब तो उसमें जिसको जो प्रिय लगता है, उससे अपना व्यवहार बनाता है या फिर समाज में यह देखते हैं परिवार के लोग कि किस बहू के घर से ज्यादा सामान शादी में आया या उसकी बहु का परिवार कितना मजबूत है, कितनी किस स्थिति में उस अनुसार भी लोग संबंध बनाते है, दोस्ती बनाते हैं।ये भेदभाव है। इस भेदभाव से ही परिवार स्त्रियों के बीच में भेदभाव रहता है। यह ज्यादा करके स्त्रियों के बीच में भेदभाव आता है।परिवार में एक ही पारम्परिक प्रतिस्पर्धा आ गई है।

Note: – शो पर बोली गयी कोई भी बात चैनल के द्वारा लिखित नहीं है जो भी अतिथि या प्रवक्ता बात कर रहे हैं वो उनके खुद की विचारधारा हैं भारत मेरे साथ चैंनल उसके लिए जिम्मेदार नहीं है।

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